नई दिल्ली, एजेंसियां। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अब जो नई एनसीईआरटी की किताबों आएगी, वह पूरी तरह से तथ्यात्मक खामियों से मुक्त होगी। शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी संसद की स्थाई समिति ने इसे लेकर अहम सुझाव दिया है। इसके तहत एनसीईआरटी की मौजूदा सभी किताबों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही इसमें मौजूद तथ्यात्मक गलतियों को चिंहित कर उन्हें दुरूस्त भी किया जाएगा।

समिति के मुताबिक 2005 के बाद से एनसीईआरटी की किताबों की कोई समीक्षा नहीं की गई है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है। समिति ने इसे लेकर विशेषज्ञों के साथ चर्चा भी की है। समिति ने पिछले दिनों ही एनसीईआरटी की नई किताबों को तैयार करने की रूपरेखा को लेकर चर्चा की थी। फिलहाल इन तथ्यात्मक गतलियों को ठीक करने से पहले खुली चर्चा की बात भी कही है। 

आरटीआई के तहत की गयी थी एनसीईआरटी से साक्ष्य की मांग

बता दें कि शिवांक वर्मा द्वारा कक्षा 12 की इतिहास के एक चैप्टर में मुगल शासकों शाहजहां और औरंगजेब द्वारा युद्ध के दौरान ध्वस्त हुए मंदिरों की मरम्मत के लिए अनुदान दिये जाने के पैराग्राफ को लेकर साक्ष्य की मांग एनसीईआरटी से आरटीआई के तहत की गयी थी। साथ ही आरटीआई के माध्यम से शिवांक ने यह भी जानना चाहा था कि इन शासकों द्वारा किन-किन मंदिरों की मरम्मत के लिए अनुदान दिया गया था। इन दोनों ही प्रश्नों के जवाब ने एनसीईआरटी ने सूचना उपलब्ध न होने की जानकारी दी थी।

गौरतलब है कि एनसीईआरटी की पुस्तकों को विद्यालयी शिक्षा के लिए बेंचमार्क माना जाता है। सिविल सेवा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी इन पुस्तकों से तैयारी करने की सलाह एक्पर्ट्स द्वारा दी जाती रही है।