रायपुर। नक्सली मददगार धर्मेद्र चोपड़ा ने एसआईबी की जांच में कई राज उगले हैं। इसमें भाजपा सरकार के एक ताकतवर मंत्री के पीए का नाम सामने आ रहा है। यह मंत्री भाजपा की पहली सरकार में भी महत्वपूर्ण पद पर थे। उस दौरान उनके पीए ने सिंगापुर की यात्रा धर्मेद्र चोपड़ा के साथ की थी।

कांकेर के नेता का नाम भी

पूछताछ में कांकेर के कद्दावर नेता का नाम भी सामने आ रहा है। सहकारिता की राजनीति से जुड़े इस नेता को धर्मेद्र ने अपना पार्टनर बताया है। एसआईबी के आला अधिकारियों के अनुसार धर्मेद्र ने वन विभाग में बड़े पैमाने पर तबादले भी कराए हैं।

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तबादले भी करवाए

पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसने वन मंत्री से मिलकर कई आला अधिकारियों का तबादला भी कराया है। इसमें एक सीएफ का नाम भी सामने आ रहा है। एसआईबी एक-दो दिन में सभी नामों का खुलासा करने की तैयारी में है। नईदुनिया के पास भी मंत्री के पीए, सहाकारिता की राजनीति से जुड़े नेता और सीएफ के नाम उपलब्ध हैं।

गोदावरी और नीको के संचालकों को नोटिस

एसआईबी के अधिकारियों ने बताया कि गोदावरी इस्पात और नीको के संचालकों को नोटिस जारी की गई है। उनसे पूछताछ की तैयारी की जा रही है। एडीजी इंटेलीजेंस मुकेश गुप्ता ने खुलासा किया था कि गोदावरी इस्पात के एक ठेकेदार ने भी नक्सलियों के सामान को पहुंचाया था।

ठेकेदारों ने की नक्सलियों की मदद

इस ठेकेदार की पहचान माणिक जैन और सुनील जैन के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि इन दोनों ने नक्सलियों के सामान, दवाएं और हथियार की सप्लाई धर्मेद्र के कहने पर रायपुर से कांकेर तक की है। एसआईबी के पास इसके पुख्ता सबूत हैं कि दोनों ठेकेदारों ने नक्सलियों की मदद की है।

नक्सलियों से जुड़े दो पुलिस अफसरों के तार

शहरी नक्सली नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों ने फिर चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने राजधानी में पदस्थ दो पुलिस अफसरों के नाम बताए हैं, जो न केवल नक्सलियों के लिए काम करते थे, बल्कि दिल के मरीज नक्सली कमांडर प्रभाकर का इलाज का पूरा प्रबंध एक निजी अस्पताल में कराते थे।

चोपड़ा उठाता था इलाज का खर्च

हालांकि इलाज का सारा खर्च धमेंद्र चोपड़ा और उसका भतीजा नीरज चोपड़ा उठाते थे। इस खुलासे के बाद एसआईबी ने दोनों पुलिस अफसरों से पूछताछ करने की तैयारी की है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि धर्मेद्र और नीरज चोपड़ा के घनिष्ठ संबंध भाजपा-कांग्रेस के बड़े लीडरों के अलावा कारोबारी, ठेकेदार, वन और पुलिस के अफसरों से रहे हैं। वे उनके घर भी आया-जाया करते थे।

नक्सली कमांडरों से संपर्क का खुलासा

दोनों कारोबारियों के शहरी नक्सली नेटवर्क से जुड़े होने के मामले में गिरफ्तारी होने के बाद वही लोग अब उनसे किनारा कर चुके हैं। पूछताछ में अफसर, नेता, ठेकेदार और रसूखदारों के नक्सली कमांडरों के साथ संर्पक का खुलासा हुआ है। इसके आधार पर एसआईबी ने उन लोगों की हिटलिस्ट बनाई है।

एक पुलिस मुख्यालय में तो दूसरा परिवाहन विभाग में

नक्सली कमांडर प्रभाकर से जिन दो पुलिस अफसरों के तार जुड़े होने के सबूत मिले हैं, वे निरीक्षक है और लंबे समय तक बस्तर में काम कर चुके हैं। वर्तमान में एक निरीक्षक पुलिस मुख्यालय में पदस्थ है और दूसरा परिवहन विभाग से मूल विभाग में वापस लौटा है।

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