श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने जीएसएलवी-डी6 रॉकेट के जरिये गुरुवार शाम 4:52 बजे अपने नवीनतम संचार उपग्रह जीसेट-6 का सफल प्रक्षेपण किया। इसरो ने स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन की मदद से दूसरी बार यह सफल प्रक्षेपण किया है। पांच जनवरी 2014 को ऐसे ही रॉकेट का पहली बार सफल प्रक्षेपण किया गया था, जिसकी मदद से जीसेट-14 को कक्षा में स्थापित किया गया था।

जीसेट-6 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष भेजने में इसरो की इस कामयाबी को सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जीसेट-6 के सफल प्रक्षेपण को 'ओणम गिफ्ट' करार देते हुए मिशन डायरेक्टर आर उम्मेश्वरम ने कहा, 'इसरो ने ओणम का उपहार दिया है..

एक भरोसेमंद प्रक्षेपण यान..

क्रायोजेनिक चरण वाला हमारे भारत में ही निर्मित यान है। यह 2 से 2.5 टन वजनी उपग्रह को प्रक्षेपित करने में सक्षम है।'प्रक्षेपण को लेकर इसरो अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने कहा, 'हमने प्रमाणित किया है कि जनवरी 2014 में जो हमें सफलता मिली थी वह अनायास नहीं थी। स्वदेशी क्रायोजेनिक चरण के लिए किया गया यह पूरी टीम के जबरदस्त प्रयासों का परिणाम है.. इस प्रक्षेपण से क्रायोजेनिक इंजन की पेचीदगियां समझ में आ गईं हैं।'इससे पहले सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लांच पैड से शाम 4:52 बजे जीएसएलवी-डी6 के जरिये 2,117 किग्रा वजनी जीसेट-6 ने उड़ान भरी और करीब 17 मिनट बाद अपनी कक्षा में प्रवेश कर गया। अमेरिका, रूस, जापान, चीन और फ्रांस के बाद इसरो छठी ऐसी अंतरिक्ष एजेंसी है, जिसके पास स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन हैं।

अमेरिकी उपग्रह लांच करेगा भारतश्रहरिकोटा

इसरो जल्द ही अमेरिका के सबसे भारी उपग्रह का प्रक्षेपण करेगा। एएस किरण कुमार ने बताया, 'अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ सहयोग से हम 2021 में जीएसएलवी-मार्क टू की मदद से एक उपग्रह का प्रक्षेपण करेंगे।'

Posted By: Sachin Bajpai

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