श्रीनगर (राज्य ब्यूरो)। उत्तर कश्मीर के रेशीपोरा (सोपोर) में अलगाववादी संगठन तहरीके हुर्रियत कश्मीर व जमायत-ए-इस्लामी के नेता को आतंकियों ने घर के बाहर मौत के घाट उतार दिया। वहीं, शनिवार को दोपहर बाद कश्मीर विश्वविद्यालय के पास नसीम बाग में इस्लामिक स्टेट के आतंकी की आतंकियों ने हत्या कर दी। फिलहाल किसी भी आतंकी संगठन ने दोनों वारदातों की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस ने श्रीनगर और सोपोर में तलाशी अभियान चला रखे हैं।

पहली हत्या सुबह साढ़े ग्यारह बजे

रेशीपोरा में तहरीके हुर्रियत कश्मीर का नेता हकीम-उर रहमान सुल्तानी (45) घर से निकल कर कार पर सवार होने  जा रहा था। 20 माह तक पत्थरबाजी और आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता के चलते कुपवाड़ा जेल में बंद रहने के बाद वह कुछ दिनों पहले रिहा हुआ था। शनिवार को दो युवक अचानक सामने आए और उन्होंने नजदीक से गोली चला दी। सुल्तानी को दो गोलियां लगी। एक गोली उसकी गर्दन में और एक सिर में। इसके बाद दोनों आतंकी भाग गए। स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से घायल हुर्रियत नेता को अस्पताल पहुंचाया, जहा डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सुल्तानी पर राष्ट्रविरोधी और आतंकी गतिविधियो में संलिप्तता के कई मामले दर्ज थे। वह हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर से तथाकथित तौर पर जुड़ा हुआ था। उसके परिवार में अब पत्नी और बुजुर्ग मां-बाप के अलावा पांच बेटियां रह गई हैं।

सुल्तानी की हत्या के लगभग पांच घंटे बाद 4.40 बजे आतंकियों ने श्रीनगर में कश्मीर विश्वविद्यालय परिसर के बाहर डल झील किनारे स्थित नसीम बाग में बैठे आतंकी आसिफ नजीर के पास तीन युवक आए। उन युवकों ने आसिफ के सिर पर प्वाइंट ब्लैंक रेंज से गोली चलाई। बाग में अफरातफरी मच गई। इस दौरान आतंकी भाग गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया। आसिफ के बारे में दावा किया जाता है कि वह पहले इस्लामिक स्टेट ऑफ जम्मू कश्मीर नामक आतंकी संगठन से जुड़ा था।

ईसा फाजली के मारे जाने के बाद वह अल-कायदा से जुड़े जाकिर मूसा के संगठन अंसार-उल-गजवा-ए-हिंद में शामिल हो गया था। नजीर के कपड़ों से पुलिस को एक पिस्तौल और दो मैगजीन के अलावा इस्लामिक यूनिवर्सिटी द्वारा जारी पहचानपत्र भी मिला है। एसएसपी श्रीनगर इम्तिया इसमाईल पर्रे ने बताया कि आसिफ नजीर डार पंजगाम अवंतीपोर का रहने वाला था। वह जनवरी, 2017 में आतंकी बना था। जाकिर मूसा के करीबियों में एक है। आतंकी बनने से पहले वह इस्लामिक यूनिवर्सिटी अवंतीपोर का छात्र था। उसके पास से यूनिवर्सिटी का जो कार्ड मिला है, उस पर उसका नाम इश्फाक लिखा हुआ था।

आतंकी संगठनों में गुटीय संघर्ष

पुलिस ने अधिकारिक तौर पर सोपोर और नसीम बाग में हुई हत्या की वारदातों को आतंकी संगठनों के बीच वर्चस्व की जंग बताने पर चुप्पी साध ली है। सूत्रों की मानें तो यह आतंकी संगठनों में गुटीय संघर्ष का नतीजा है। कुछ समय पहले जाकिर मूसा ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े कई नेताओं को निशाना बनाने की धमकी दी थी। हिज्ब ने भी जवाबी कार्रवाई करने का दावा किया था। तहरीके हुर्रियत कश्मीर से जुड़े हकीम उर रहमानी जमायत-ए- इस्लामी से भी जड़ा था। जमायत और तहरीके हुर्रियत को हिज्ब का करीबी भी माना जाता है। वर्ष 2015 में आतंकी क्यूम नजार जिसने कश्मीर में तहरीके तालिबान और फिर इस्लामिक स्टेट ऑफ जम्मू कश्मीर की नींव तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी, ने सोपोर और बारामुला में हुर्रियत व हिज्ब से जुड़े पांच लोगों की हत्या की थी।