पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी बायोफ्यूल की वैश्विक खपत, खाद्य तेल के दामों में आएगा उछाल
पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़ने से बायोफ्यूल की वैश्विक खपत बढ़ी है, जिससे खाद्य तेलों की कीमतें बढ़ने की आशंका है।
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कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बायोफ्यूल उत्पादन को बढ़ावा दिया।
HighLights
बायोफ्यूल में वनस्पति तेलों का उपयोग बढ़ने से दाम बढ़े।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बायोफ्यूल उत्पादन को बढ़ावा दिया।
भारत में सोयाबीन तेल का आयात बढ़ने का अनुमान है।
राजीव कुमार, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के साथ रूस-यूक्रेन संकट के कारण न सिर्फ कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं बल्कि इससे खाद्य तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका गहरा गई है। काउंसिल ऑफ पाम आयल प्रोड्यूसिंग कंट्रीज (सीपीओपीसी) के मुताबिक वनस्पति तेल के 27 प्रतिशत हिस्से का इस्तेमाल अब बायोफ्यूल निर्माण के लिए हो रहा है।
इनमें मुख्य रूप से पाम व सोयाबीन शामिल है। पिछले एक साल में खाद्य तेल की कीमतों में 20 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है और आगे भी यह बढ़ोतरी जारी रहेगी। वनस्पति तेल के दाम बढ़ने से सिर्फ खाद्य तेल की कीमत नहीं बढ़ती है।
साबुन, तेल, टूथपेस्ट, बिस्कुट व कई अन्य एफएमसीडी गुड्स की लागत इससे बढ़ जाती है क्योंकि इनमें भी पाम आयल का इस्तेमाल होता है। खाद्य तेल के दाम को नियंत्रण में रखने के लिए गत सितंबर माह में सरकार ने पाम तेल के आयात पर लगने वाले शुल्क में कटौती तक कर दी।
क्यों बढ़ेंगे खाद्य तेल के दाम
पश्चिम एशिया संकट का हल नहीं निकलने और वैश्विक उथल-पुथल के नए आयाम को देखते हुए पाम व सोयाबीन के बड़े उत्पादक देश ईंधन सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुट गए हैं। ईरान-अमेरिका युद्ध से पहले कच्चे तेल के दाम 65 डालर प्रति बैरल थे जो अब 100 डालर प्रति बैरल के पार चले गए हैं, इसलिए खाद्य तेल से जुड़े पाम ऑयल और सोयाबीन का इस्तेमाल अब बायोडीयल या बायोफ्यूल में बनाने में होने लगा है। हर साल वैश्विक बायोफ्यूल का बाजार 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
कच्चे तेल के बढ़ते दाम को देख इंडोनेशिया ने अपने देश में बी50 नियम लागू कर दिया है। मतलब वहां पाम ऑयल से बायोफ्यूल बनाया जाएगा और पेट्रोल-डीजल में 50 प्रतिशत मिलावट बायोफ्यूल की होगी। इससे इंडोनेशिया को कच्चे तेल के आयात में खर्च होने वाले करीब आठ अरब डालर की बचत होगी।
इंडोनेशिया पाम का सबसे बड़ा उत्पादक देश है और भारत सबसे अधिक पाम तेल इंडोनेशिया से ही खरीदता है। इंडोनेशिया के बाद भारत को पाम तेल सप्लाई करने वाला दूसरा देश मलेशिया ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल-डीजल में 30 प्रतिशत तक बायोफ्यूल मिलाने का लक्ष्य रखा है। इसलिए वहां से भी पाम तेल की सप्लाई प्रभावित होने लगी है।
ब्राजील और अर्जेंटीना सोयाबीन का बड़ा उत्पादक देश है और यहां सोयाबीन से बायोफ्यूल बनाया जा रहा है। ब्राजील तो 100 प्रतिशत तक बायोफ्यूल का इस्तेमाल कर रहा है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमत से बचने के लिए अमेरिका ने भी बायोफ्यूल बनाने में अपने सोयाबीन और मक्के के इस्तेमाल को बढ़ा दिया है।
जानकारों का कहना है कि जिन देशों के पास कच्चे माल नहीं है, उनके लिए बायोफ्यूल पेट्रोल-डीजल से महंगा ही साबित होगा। लेकिन जिन देशों के पास बायोफ्यूल बनाने के लिए पाम, सोयाबीन या फिर मक्का जैसे कच्चे माल है, उनके लिए बायोफ्यूल पेट्रोल-डीजल का सस्ता विकल्प है। भारत भी मक्के से एथनाल बनाकर 20 प्रतिशत एथनाल का इस्तेमाल पेट्रोल में कर रहा है।
काउंसिल फार पाम ऑयल प्रोड्यूसिंग कंट्रीज (सीपीओपीसी) अक्टूबर के आखिर में चीन में अपनी बैठक आयोजित करने जा रही है जहां बायोफ्यूल बनाने में खाद्य तेल के बढ़ते इस्तेमाल पर विचार किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि इस बार भारत में सोयाबीन का उत्पादन भी कम है।
अनुमान है कि भारत अगले नवंबर से शुरू होने वाले तेल सीजन में करीब 56 लाख टन सोयाबीन तेल का आयात करेगा। ब्राजील अर्जेंटीना में बायोफ्यूल निर्माण में सोयाबीन के इस्तेमाल बढ़ने से इसकी कीमत भी पिछले एक साल में 15 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुकी है।
पिछले साल नवंबर से लेकर इस साल सितंबर तक भारत ने 155 लाख टन वनस्पति तेल का आयात किया है। इनमें पाम, सूरजमुखी, रेपसीड व अन्य तेल शामिल है। पाम व सोयाबीन तेल के दाम बढ़ने से सरसों से लेकर अन्य सभी प्रकार के खाद्य तेल के दाम बढ़ जाते हैं।
