जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की बढ़ी मांग के मद्देनजर महात्मा राष्ट्रीय गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को अतिरिक्त 20 हजार करोड़ रुपये की दरकार है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने इस बाबत वित्त मंत्रालय को मसौदा भेजकर अतिरिक्त आवंटन की मांग की है। शहरी क्षेत्रों में रोजी रोजगार की किल्लत के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा साल दर साल लोकप्रिय होती जा रही है।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत सभी ग्रामीणों को सालभर में सौ दिनों का रोजगार प्राप्त करने का अधिकार है। देश में फिलहाल नौ करोड़ मनरेगा जॉब कार्ड धारक हैं। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीने के दौरान 140 करोड़ मानव दिवस सृजित किये गये हैं। जबकि पिछले पूरे साल के दौरान 258 करोड़ मानव दिवस सृजित किये गये थे।

देश में कुल नौ करोड़ जॉब धारक परिवार

चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में प्रत्येक जॉब कार्ड धारक मजदूर को अब तक औसतन 35 दिनों का काम दिया जा चुका है। जबकि मनरेगा के तहत सालभर में प्रत्येक अकुशल मजदूर को एक सौ दिनों का रोजगार देने का प्रावधान है। पिछले वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान कुल 268 करोड़ मानव दिवस सृजित किये गये थे। जबकि अनुमान 256 करोड़ मानव दिवस के सृजन का अनुमान था। पिछले साल प्रत्येक जॉब कार्ड धारक परिवार को औसतन 51 दिनों का काम मिल गया था। वर्ष 2017-18 में मनरेगा के तहत 234 करोड़ मानव दिवस सृजित किये गये थे। उस समय साल में प्रत्येक जॉब कार्ड धारक को औसतन 46 दिनों का काम मिल पाया था। योजना के तहत फिलहाल देश में कुल नौ करोड़ जॉब कार्ड धारक परिवार हैं।

केवल 12 हजार करोड़ रुपये ही मंत्रालय को प्राप्त

चालू वित्त वर्ष 2019-20 के आम बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मनरेगा के लिए 60,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया था, जो अब तक का सर्वाधिक आवंटन रहा है। वित्तमंत्री सीतारमण ने इसके साथ यह भी जोड़ा कि यह मांग आधारित कानूनी योजना है, जिसके लिए जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त धन भी मुहैया कराया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय की समीक्षा में पाया गया कि वित्त वर्ष का आधा बीत चुकने यानी सितंबर तक केवल 12 हजार करोड़ रुपये ही मंत्रालय को प्राप्त हो सका है। मनरेगा में सर्वाधिक रोजगार की मांग गरमी के महीने में होती है, जब खेतिहर मजदूर खेती के काम से फारिग हो जाता है।

पिछले साल बजट में 56 हजार करोड़ रुपये का आवंटन

ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मंत्रालय ने 20 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त मांग की है। जबकि जनवरी महीने के आसपास मंत्रालय अपने खर्च की समूची समीक्षा कर वित्त मंत्रालय से पूरा भुगतान करने का आग्रह करता है। पिछले साल बजट में जहां 55 हजार करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। उसके अतिरिक्त 21 हजार करोड़ रुपये की मांग की गई थी। हालांकि वित्त मंत्रालय ने केवल छह हजार करोड़ रुपये का आवंटन मजदूरी वाले हिस्से के भुगतान के लिए किया था।

बजटीय आवंटन की धनराशि को राज्यों की मांग के आधार पर पहले ही भेज दिया जाता है। राज्यों में भी रोजगार की मांग के आधार पर पहले ही धनराशि खर्च कर ली जाती है। इसके आधार पर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने समीक्षा के बाद पिछले साल के अनुभव के आधार पर वित्त मंत्रालय से धन की मांग की है।

Posted By: Dhyanendra Singh

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