नई दिल्ली [जयप्रकाश रंजन] । कुछ महीने पहले तक भारत व पाकिस्तान के तनाव की वजह से दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के अस्तित्व पर ही सवाल उठाया जा रहा था लेकिन कोरोना वायरस के डर ने इस संगठन को लेकर नई उम्मीद जगा दी है। गुरुवार को सार्क देशों के स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों के बीच पहली बार कोरोना के खिलाफ लड़ाई को लेकर एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने व बेहतरीन उपायों को साझा करने को लेकर एक अहम बैठक हुई।

हेल्‍थ सेक्‍टर में सार्क देशों की पहली बैठक

हेल्थ सेक्टर को लेकर सार्क देशों के बीच यह अपनी तरह की पहली बैठक थी। इसमें यह फैसला किया गया है सभी सदस्य देशों के हेल्थ सेक्टर के चुनिंदा अधिकारियों के बीच एक व्हाट्सएप ग्रुप का गठन होगा ताकि सूचनाओं को सीधे एक दूसरे से साझा किया जा सके।

सबसे अधिक प्रभावित सदस्‍य पाकिस्‍तान

सार्क देशों में पाकिस्तान कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। वहां इसके पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1200 से भी ज्यादा हो चुकी है। दूसरे स्थान पर भारत है जहां कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 600 से ज्यादा हो चुकी है। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से सार्क देशों के बीच कोरोना वायरस के खिलाफ साझा रणनीति बनाने का जब प्रस्ताव आया था तब पाकिस्तान ने काफी ठंडी प्रतिक्रिया दी थी और पहली बैठक में जहां अन्य सभी देशों के राष्ट्रप्रमुखों ने हिस्सा लिया था वहीं पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व वहां के पीएम इमरान खान के स्वास्थ्य सलाहकार किया था। लेकिन अब पाकिस्तान का रवैया बदला हुआ है।

थर्ड फेज को रोकने के लिए भारत में लॉकडाउन

26 मार्च को हुई बैठक में भारत के डायरेक्टर जेनरल आफ हेल्थ सर्विसेज (डीजीएचसी) ने हिस्सा लिया था। बैठक में कोविड-19 वायरस के प्रसार को रोकने को लेकर अपनाये जाने वाले तरीकों पर खास तौर पर चर्चा हुई। भारत की तरफ से एक विस्तृत प्रजेंटेशन दिया गया जिसमें बताया गया कि किस तरह से वह कोरोना वायरस को थर्ड फेज में पहुंचने से पहले रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर लाकडाउन लागू कर चुका है। यात्रा करने पर लगे प्रतिबंध को किस तरह से लागू किया जा रहा है और लोगों को आवश्यक सामान पहुंचाने के लिए क्या इंतजाम किए जा रहे हैं।

भारत ने प्रस्ताव दिया है कि सार्क देशों के बीच एक संयुक्त इलेक्‍ट्रॉनिक प्लेटफार्म बनेगा जिसमें सभी सदस्य देश अपने अनुभव, बीमारी को भगाने के नए तरीके या इससे जुड़े दूसरी जानकारियों को साझा करेंगे। इस प्लेटफार्म के बनने तक व्हाट्सएप ग्रुप का गठन किया जाएगा ताकि सूचनाओं के आदान-प्रदान का काम पहले से शुरू हो सके। सार्क के दूसरे देशों ने भी अपने अपने अनुभव साझा किये। सभी सदस्यों ने अपनी कमियों और इससे निपटने के तरीकों के बारे में भी बताया। निजी सेक्टर को इस लड़ाई में शामिल करने और इस बीमारी के बड़े स्तर पर फैल जाने की स्थिति में संभावित उपायों को भी साझा किया।

Posted By: Monika Minal

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