नई दिल्ली, एएनआइ। भारत ने गुरुवार को कहा कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति का पता लगाने में उसकी भी रुचि है। इस मामले में संबंधित पक्षों को सहयोग करना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान कहा कि कोरोना वायरस की उत्पत्ति के मुद्दे पर आगे के अध्ययन और डाटा में हमारी रुचि है। लेकिन इसमें सभी संबंधित पक्षों द्वारा सहयोग की जरूरत है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने संवाददाताओं से कहा कि हमने जो पहले कहा है उसे दोहरा रहे हैं। इस मसले पर आगे अध्ययन और उत्पत्ति के संबंध में आंकड़ों और सभी संबंधित पक्षों की समझ एवं सहयोग को लेकर हमारे हित जुड़े हैं। बागची से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा कोरोना की उत्पत्ति और महामारी के उभरने वाले रोगजनकों की पहचान को एक वैज्ञानिक सलाहकार समूह गठित करने की घोषणा करने के बारे में पूछा गया था।

डब्ल्यूएचओ ने कोरोना के नए पैथोजेंस (रोगजनकों) की उत्पत्ति का पता लगाने को डब्ल्यूएचओ वैज्ञानिक सलाहकार समूह (एसएजीओ) के प्रस्तावित सदस्यों की घोषणा की है। यह समूह महामारी के उभरने वाले रोगजनकों की उत्पत्ति और महामारी की क्षमता का अध्ययन कर इससे निपटने के लिए वैश्विक फ्रेमवर्क विकसित करने के लिए डब्ल्यूएचओ को सलाह देगा। एसएजीओ में अमेरिका, चीन और कुछ अन्य देशों के 26 वैज्ञानिक शामिल होंगे। 

गौरतलब है कि कोरोना की उत्पत्ति का मसला पिछले करीब डेढ वर्षों से काफी जटिल मुद्दा बना हुआ है। इससे पहले अप्रैल में एक रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि ऐसी संभावना नहीं है कि कोरोना वुहान के लैब से लीक हुआ। इस रिपोर्ट के आने के बाद अमेरिका समेत कुछ अन्य देशों ने चिंता जताई थी कि चीन डब्ल्यूएचओ की टीम को पूरा आंकड़ा उपलब्ध नहीं करा रहा है। सनद रहे कि कोरोना का पहला मामला चीन के वुहान शहर में सामने आया था।