अजय कृष्ण- श्रीवास्ताव, वाराणसी

पैसे से ज्ञान तो नहीं खरीदा जा सकता है पर हां ज्ञान से पैसा कमाया जा सकता है। कई शिक्षाविदों ने माना है कि देश से गरीबी, भुखमरी खत्म करनी हो तो बच्चों को शिक्षित करना जरूरी है। कई सरकारी प्रयास होने के बाद भी हजारों अभिभावक अब भी ऐसे हैं जो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं। इसके पीछे उनकी मजबूरी भी है। मजबूरी से ग्रस्तक ऐसे ही बच्चों के लिए मानव संसाधन एवं महिला विकास संस्थान ऐसे बच्चों शिक्षित करने में जुटी है । ये मजबूर बच्चों को ईंट के भट्टे के पास पढ़ाने का काम करती है।


संस्था 1990 में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. राजाराम शास्त्री ने शुरू की थी। उनके निधन के बाद उसके अनुयायियों ने इस संस्था को आगे बढ़ाने का काम जारी रखा। ईंट के भट्ठे, मजदूरी करने वाले बच्चों शिक्षा की आस जगाने का काम किया। इसके लिए ईंट के भट्ठे पर ही शाम को अनोखी कोचिंग की शुरूआत की।

इस कोचिंग में मजदूरी करने वाले बच्चों को प्रतिदिन शाम को पढ़ाना शुरू किया। वहीं स्कूल न जाने वाले बच्चों का सरकारी स्कूलों में दाखिला भी कराया। अभिभावकों को जागरूक करने के साथ उनकी आय बढ़ाने के लिए महिलाओं को हुनरमंद बनाने का भी साथ-साथ काम कर रहे हैं। उन्हें डिटर्जेंट पाउडर बनाने, कालीन बुनाई सहित अन्य विधाओं में दक्ष बना रहे हैं। ताकि वह अपने बच्चों को पढ़ा सके।

 

संस्था के प्रमुख डा. भानुजा शरण लाल ने बताया कि वर्तमान में सेवापुरी ब्लाक के हसनपुर, बिगवापुर, बड़ागांव के सिसवा सहित अन्य ब्लाकों में दस स्थानों पर कोचिंग चल रहा है। वाराणसी के अलावा भदोही व चंदौली में भी गरीब बच्चों को शिक्षित करने का काम जारी है। टीम में रमेश कुमार रॉव, अखिलेश कुमार, खुशबू चौरसिया, जूही श्रीवास्तव सहित अन्य लोग शामिल हैं।

 

By Krishan Kumar