शहरों को बेहतर बनाने के आपके साथ शुरू की गई 'माय सिटी माय प्राइड' पहल के सकारात्मक असर अब सामने आने लगे हैं। इस अभियान के प्रमुख पिलर इंफ्रास्ट्रक्चर में हर शहर के कुछ ऐसे लोग हैं जो कि शहर को बेहतर बनाने का काम कर रहे हैं। इनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता है और इन्हें अपने शहरों में मिसाल के तौर पर अपनाया जा सकता है।इंदौर शहर समय-समय पर जारी होने वाली सरकार की रेटिंग में अव्वल रहने के लिहाज से सबसे शानदार शहर के रूप में अपनी जगह बनाता रहा है।

 

बुनियादी सुविधाओं के लिहाज से इंदौर लगातार अपने को अपडेट कर रहा है। राज्य प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी मनीष सिंह का जिक्र किए बिना इंदौर में बुनियादी सेवाओं के बेहतरीन विकास की गति को समझना बेमानी होगा। शहर की बुनियादी सेवाओं को दुरुस्त करने की दिशा में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी मनीष सिंह के काम और प्रतिबद्धता को देखते हुए उन्हें ''मशीन सिंह'' के नाम से बुलाया जाता है।

वे देर रात सफाई-व्यवस्था पर निगरानी करते थे और अलसुबह खुले में शौच से शहर को मुक्त करने के लिए बस्तियों का दौरा करते थे। नतीजा इंदौर में आज हर मोर्चे पर विकास को देखा जा सकता है।

वहीं, पटना की पहचान गंगा से होती है। लेकिन वक्त के साथ उसकी धारा में प्रदूषण का जहर घुलता जा रहा है। इसी को समझते हुए डॉ. अशोक कुमार घोष ने मैराथन अभियान चलाया। उन्होंने स्कूलों के बच्चों को गंगा की सफाई से जोड़ा। ताकि नई पीढ़ी नदी के महत्व को समझ सके।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शहर मेरठ में भी ऐसी ही मुहिम एक अन्य डॉक्टर विश्वजीत बेम्बी की अगुवाई में चलाई जा रही है। बेम्बी की टीम शहरों में जमा कूड़ा उठाती है, स्ट्रीट पेटिंग कर दीवारों को खूबसूरत बनाने का काम करती हैं। उनकी टीम में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, आंत्रप्रेन्योर और शिक्षक तक शामिल हैं लेकिन सबसे ज्यादा संख्या छात्रों की है।

एक तरफ लोग धरती की कोख खाली करते जा रहे हैं तो दूसरी तरफ मेरठ के गिरीश शुक्ला का प्रयास रेन वॉटर हार्वेस्टिंग यूनिट बनवाकर भूजल से धरती की कोख को भरना है। चुनौतियों के बावजूद वह इस प्रयास में काफी हद तक सफल भी हुए हैं। रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की देशव्यापी कोशिश भारत में पानी की समस्या का समाधान कर सकती है। ऐसे ही एक और हीरो हैं अमित कुमार अग्रवाल। उन्होंने 'क्लीन मेरठ' के नाम से स्वच्छता की मुहिम छेड़ रखी है। अगर देश के दूसरे शहरों में भी ऐसे ही लोग आ जाएं तो हम बापू के सफाई के सपने को साकार करने में कामयाब हो जाएंगे।

'नवाबों के शहर' लखनऊ में गोमती नदी का संरक्षण वक्त की जरूरत है। इस दिशा में डॉ. दत्ता पिछले 12 सालों से काम कर रहे हैं। ताकि आने वाली पीढ़ियों को गोमती का पानी मिल सके। ऐसी ही मुहिम ऋषि किशोर गौड़ चला रहे हैं ताकि गोमती नदी साफ हो सके। इसके साथ वे 2014 से रोटी कपड़ा बैंक चला रहे है जिसमें गरीबों को मदद की जाती है।

 

लखनऊ से दूर पंजाब के लुधियाना में हरप्रीत सोई का नाम स्थानीय प्रशासन के खतरे की घंटी बन चुका है। सोई का एनजीओ ''लुधियाना केयर'' शहर के तमाम कॉरपोरेट घरानों की महिलाओं से जुड़ा एनजीओ है और जैसे ही उन्हें कोई स्थानीय समस्या नजर आती है, वह प्रेशर ग्रुप की तरह काम करते हुए स्थानीय प्रशासन, पुलिस और संबंधित विभागों पर अपने प्रभावों और सोशल मीडिया की मदद से इतना दबाव बना देता है कि प्रशासन के सामने इसका समाधान करने के अलावा कोई और चारा नहीं रह जाता।

पर्यावरण को लेकर रायपुर का काम शानदार है। यहां पर बड़े पैमाने पर साइकिल ट्रैक का निर्माण किया गया है। इससे गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण तो कम होगा ही साथ ही लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार आएगा। यह ऐसी सीख जो कि हर शहर को अपनानी चाहिए ताकि आबोहवा शुद्ध हो सके।

रांची शहर को हरा-भरा रखने और प्राकृतिक खूबसूरती को बनाए रखने के लिए ''अमृत'' योजना के तहत पार्कों का निर्माण किया जा रहा है। आबोहवा के लिहाज से रांची की स्थिति अन्य शहरों के मुकाबले ज्यादा अच्छी है, ऐसे में यह पहल इस शहर को रहने के लिहाज से और भी शानदार बना सकती है।

तो आइए, आप भी ऐसी कोई पहल शुरू करें या ऐसी पहल से जुड़ें। ऐसी समाजसेवा कर रहे किसी किसी रियल हीरो को अगर आप जानते हैं तो हमें भी बताएं। mcmp.jagran@gmail.com

 

By Krishan Kumar