नई दिल्ली, प्रेट्र भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआइ) मेडिकल में दिव्यांगों के दाखिले के लिए दिशा निर्देश के मसौदे को अब तक अंतिम रूप नहीं दे पाई है। इससे दिव्यांग असमंजस में हैं। परेशानी यह है कि छात्रों ने आवेदन तो कर दिया है, लेकिन उन्हें मालूम नहीं कि वे आवेदन की योग्यता पूरी कर पा रहे हैं या नहीं। आवेदन में बदलाव व सुधार की तारीख खत्म होने में कुछ दिन ही शेष हैं।

एमसीआइ द्वारा अब तक दिशा निर्देश जारी नहीं होने से वे बदलाव भी नहीं कर पा रहे हैं। जल्द तस्वीर साफ नहीं हुई तो अनेक दिव्यांग छात्र एमबीबीएस में दाखिले के लिए नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा)से महरूम रह सकते हैं।

'डॉक्टर विद डिसेबेलिटी, एजेंट ऑफ चेंज' नामक संस्था ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व सामाजिक अधिकारिता मंत्रालय को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। संस्था के संस्थापक डॉ. सुरेंद्र सिह ने कहा कि दिव्यांग छात्रों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। इससे उनका भविष्य अधर में दिख रहा है। उन्होंने जल्द दिशा निर्देश जारी कराने की मांग है।

उल्लेखनीय है कि एमसीआइ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) ने नवंबर में दिशा निर्देश का मसौदा जारी किया था, जिसमें एमबीबीए में दाखिले के लिए दिव्यांगता की अधिकतम सीमा तय करने का प्रस्ताव हुआ है। दिव्यांग डॉक्टरों के संगठनों ने उस मसौदे का विरोध किया था और उसमें बदलाव करने की मांग की थी।

डॉ. सुरेंद्र सिह ने कहा कि नीट नेशनल टेस्ट एजेंसी (एनएटी) आयोजित करेगी। मई में यह परीक्षा होने वाली है। एनएटी ने आवेदन में बदलाव व सुधार के लिए 14 से 31 जनवरी की तारीख तय की है। जबकि अब तक एमसीआइ ने दिशा निर्देश जारी नहीं किए है। इससे यह तय नहीं हो पाया है कि दिव्यांगों के आवेदन के लिए क्या पैमाना होगा।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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