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सर्वाधिक वर्षा वाले मावसिनराम और चेरापूंजी में सूखे का खतरा, मौसम में नए पैटर्न की क्या है वजह?

Published: Mon, 21 Sep 2026 10:57 PM (IST)

मावसिनराम और चेरापूंजी, जो विश्व में सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्र हैं, अब जलवायु परिवर्तन के कारण सूखे के खतरे का सामना कर रहे हैं।

मावसिनराम और चेरापूंजी में सूखे का खतरा।

मावसिनराम और चेरापूंजी में सूखे का खतरा।

HighLights

  1. मावसिनराम और चेरापूंजी में सूखे का बढ़ता खतरा।

  2. जलवायु परिवर्तन से वर्षा के दिनों में कमी आई।

  3. बढ़ते तापमान और भूजल स्तर में गिरावट।

डिजिटल डेस्क, शिलांग। पूर्वोत्तर राज्य मेघायल में स्थित विश्व के सर्वाधिक वर्षा वाले दो क्षेत्र अब सूखे की कगार पर हैं। मौसम में ऐसे उलट बदलाव को एक नए अध्ययन में स्पष्ट किया गया है।

इसके अनुसार जलवायु परिवर्तन के चलते विश्व प्रसिद्ध मावसिनराम और चेरापूंजी में वर्षा के दिन घट गए हैं और चंद दिनों में अत्यधिक तेज बारिश होने और बढ़ते तापमान के चलते मेघालय के इन दो क्षेत्रों को सूखे के खतरे का सामना करना पड़ सकता है। अनुमान है कि सूखे की घटनाएं निकट भविष्य से ही निरंतर बढ़ती जाएंगी।

हाल ही में "थियोरेटिकल एंड एप्लाइड क्लाइमेटालिजी" में प्रकाशित हुए इस अध्ययन में वर्ष 1981-2100 की अवधि के लिए राज्य और आसपास के क्षेत्रों के लिए अनुमानित जलवायु और जलविज्ञान डाटा का विश्लेषण किया गया, ताकि वर्षा की तीव्रता में वृद्धि के साथ सूखे की संवेदनशीलता के स्पष्ट विरोधाभास को समझा जा सके।

शोधकर्ताओं ने जल प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता बताई जो न केवल कुल वर्षा, बल्कि इसकी तीव्रता और वितरण, बढ़ते तापमान और बेसिन स्तर के जल प्रवाह को भी ध्यान में रखें। शोधकर्ताओं आशेश रुद्र पाल और पंकज कुमार राय ने पाया कि मेघों का आलय माने जाने वाले राज्य के इन दो क्षेत्रों में हल्की वर्षा और वर्षा के दिनों की संख्या में कमी आ रही है, जबकि कुछ ही दिनों में बेहिसाब बरसात हो जाती है।

अध्ययन में सरल दैनिक तीव्रता सूचकांक में वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें अधिकतम स्थानीय वृद्धि 0.08 मिमी प्रति दिन प्रति वर्ष थी। वर्षा के दिनों की संख्या औसतन 0.40 दिन प्रति वर्ष कम हुई है। एसडीआईआई जलवायु सूचकांक है जो एक विशेष अवधि में "वर्षा दिवस" पर औसत वर्षा की मात्रा (मिमी/दिन में) मापता है। अध्ययन के निष्कर्षों ने "मेघालय में बढ़ते सूखे के खतरे की स्पष्ट प्रवृत्ति" को दर्शाया।

भविष्य में सूखे की घटनाएं बढ़ती जाएंगी

अध्ययन ने अनुमान लगाया कि सूखे की घटनाएं निकट भविष्य से दूरगामी भविष्य तक सामान्यतः बढ़ेंगी, जिनमें सबसे मजबूत वृद्धि एसएसपी 585 के तहत होगी। शोधकर्ताओं ने साड़ी-गौवाइन और सुरमा-मेघना नदी बेसिन का अध्ययन किया, जो दोनों मेघालय से उत्पन्न होते हैं या महत्वपूर्ण प्रवाह प्राप्त करते हैं।

मॉडल ने एसएसपी 585 के तहत भविष्य में साड़ी-गौवाइन बेसिन में औसत वार्षिक प्रवाह में 9.8 प्रतिशत की अधिकतम कमी का अनुमान लगाया। एसएसपी 585 एक उच्च-उत्सर्जन जलवायु परिवर्तन परिदृश्य है। मानसून में नदी का प्रवाह तेज रहेगा, जो जून-जुलाई के करीब चरम पर होगा और फिर घटेगा। इससे सूखे का खतरा बढ़ सकता है।

अधिक वर्षा और भूजल में कमी

शोधकर्ताओं ने कहा कि मेघालय में वर्षा के बदलते पैटर्न का इसकी ढलान वाली भूमि और उथली मिट्टी से विशेष संबंध है। तीव्र वर्षा सतही प्रवाह तेजी से बढ़ाती है, जिससे यह जल मिट्टी में अवशोषित होने के बजाय भूजल क्षमता में कमी लाता है। इससे मानसून में भारी वर्षा सूखे रह जाने वाले महीनों में पर्याप्त पानी नहीं दे पाती।

बढ़ता तापमान भी जलवाष्पीकरण को बढ़ाकर दबाव डाल रहा है या मिट्टी, वनस्पति और अन्य सतहों से पानी की हानि को बढ़ा रहा है। न्यूनतम तापमान प्रति वर्ष 0.08 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ रहा है। उच्च तापमान वायुमंडलीय जल की मांग को बढ़ाते हैं और वर्षा-रहित अवधि के दौरान मिट्टी की नमी तेजी से कम करते हैं।

जलाशय और जलप्रपात तेजी से सूख रहे

अध्ययन में कहा गया,"वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण होगा।" स्थानीय अवलोकनों से भी बढ़ते जल तनाव का संकेत मिलता है।

सोहरा और मावसिनराम के निवासियों ने कहा कि कई जलाशय और जलप्रपात इस वर्ष तेजी से सूख रहे हैं और यह प्रवृत्ति सितंबर के मध्य में ही दिखाई देने लगी थी। एक गेस्ट हाउस चलाने वाले मावकिसीम निवासी पी. हुजोन ने कहा, "सोहरा क्षेत्र में कई जलप्रपात सूख रहे हैं और मैं इसे सितंबर के मध्य में ही देख रहा हूं।"

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)