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    'Supreme Court को सुप्रीम कहलाने का अधिकार नहीं', मौलाना मदनी के बिगड़े बोल; भोपाल में जमकर उगला जहर

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 04:17 PM (IST)

    जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने देश में डर का माहौल होने की बात कही है। उन्होंने धर्म की आजादी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है और दूसरे को खुली छूट दी जा रही है। उन्होंने देश के मौजूदा हालात पर चिंता जताई और सुप्रीम कोर्ट से संविधान का पालन करने की अपील की।

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    मौलाना महमूद मदनी। (फाइल फोटो)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि देश में इस समय डर का माहौल चल रहा है और सुप्रीम कोर्ट सरकार के दबाव में काम कर रहा है।

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    उन्होंने कहा, "देश के संविधान ने हमें धर्म की आजादी का अधिकार दिया है। लेकिन धर्म बदलने के कानून के जरिए इस बुनियादी अधिकार को खत्म किया जा रहा है। इस कानून का इस्तेमाल इस तरह से किया जा रहा है कि किसी धर्म को मानने वाले को डर और सजा का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, 'घर वापसी' के नाम पर लोगों को किसी खास धर्म में बदलने वालों को खुली छूट है। उनसे कोई पूछताछ नहीं होती और उनके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होती।"

    'देश के हालात चिंताजनक'

    उन्होंने आगे कहा, "देश के मौजूदा हालात बहुत संवेधनशील और चिंताजनक हैं। दुख की बात है कि एक खास समुदाय को जबरदस्ती निशाना बनाया जा रहा है, जबकि दूसरे समुदाय को कानूनी तौर पर कमजोर, सामाजिक रूप से अलग-थलग और आर्थिक रूप से बेइज्जत किया जा रहा है। बुलडोजर एक्शन, मॉब लिंचिंग, वक्फ प्रॉपर्टी पर कब्जा और धार्मिक मदरसों और सुधारों के खिलाफ नेगेटिव कैंपेन चलाए जा रहे हैं, ताकि उनके धर्म, पहचान और वजूद को कमजोर किया जा सके...इससे मुसलमान सड़कों पर चलते हुए भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।"

    'सुप्रीम कोर्ट कर रहा सरकार के दबाव में काम'

    मदनी ने कहा, "बाबरी मस्जिद, तीन तलाक और कई दूसरे मामलों में फैसले के बाद, ऐसा लगता है कि कोर्ट कुछ सालों से सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। हमारे पास पहले भी कई ऐसे उदाहरण हैं जिनसे कोर्ट के कैरेक्टर पर सवाल उठे हैं। सुप्रीम कोर्ट तभी सुप्रीम कहलाने के लायक है जब वह संविधान को माने और कानून को बनाए रखे। अगर वह ऐसा नहीं करता है, तो वह 'सुप्रीम' कहलाने के लायक नहीं है।"

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