नई दिल्ली, जेएनएन। पूर्वी लद्दाख सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों की वापसी के लिए दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच चुशूल में मंगलवार सुबह बैठक शुरू हुई। बैठक देर शाम तक जारी रही। इस बैठक में सैन्य वापसी के लिए अभी तक उठाए गए कदमों की समीक्षा के साथ इसे किस तरह आगे बढ़ाया जाए इस पर गहन विचार विमर्श हुआ। दोनों देशों के बीच यह सैन्य स्तरीय चौथी वार्ता थी। विदेश मंत्रालय के स्तर पर भी तीन दौर की बातचीत हो चुकी है। इस बार की बैठक भारतीय सीमा में चुशूल में हुई। 

देर रात तक चली दोनों देशों के सैन्य कमांडरों के बीच वार्ता 

सैन्य कमांडर स्तरीय पहली वार्ता 6 जून, 2020 को हुई थी जिसमें चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर 5 मई, 2020 से पहले वाली स्थिति बहाली करने पर रजामंदी दिखाई थी लेकिन बाद में उस पर अमल नहीं हो सका। 15 जून, 2020 को दोनों सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद सैन्य कमांडरों के बीच 22 जून और 30 जून को भी दिन-दिन भर मंथन हुआ। इस बीच भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की चीन के विदेश मंत्री वांग यी से भी अलग से विस्तृत चर्चा हुई है। फिर एनएसए अजीत डोभाल की वांग यी से अलग से बातचीत हुई जिसके बाद हालात को ठीक करने में मदद मिली। 

कूटनीतिक व सैन्य सूत्रों के मुताबिक अभी तक की सैन्य वापसी पूरी तरह से संतोषप्रद है। ताजा हालात के मुताबिक पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना ने गोगरा, हॉट स्पि्रंग, गलवन वैली से अपनी तैनाती वापस कर ली है। पैंगोंग झील के पास स्थित फिंगर फोर से भी चीनी सैनिकों की संख्या और उनका साजोसमान कम हुआ है।

Posted By: Arun Kumar Singh

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