मुंबई। शहरों में रहने वाली महिलाओं को दिल की बीमारी ज्यादा होती है। इनमें 70 प्रतिशत की मौत की वजह दिल की बीमारियां होती हैं। मर्ज का देर से पता चलना और धूमपान की लत इसका सबसे बड़ा कारण है। जाने माने हार्ट सर्जन और एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट के उपाध्यक्ष रमाकांत पांडा ने 'व‌र्ल्ड हार्ट डे' की पूर्व संध्या पर शनिवार को यह बात कही।

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जनवरी, 2009 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का सफल ऑपरेशन करने के बाद चर्चा में आए पांडा ने कहा कि तंबाकू सेवन से बचना सेहत के लिए अच्छा है। इस वर्ष व‌र्ल्ड हार्ट डे की थीम महिलाओं और बच्चों में दिल की बीमारियों की रोकथाम रखी गई है। उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में महिलाएं धूमपान करती हैं, जिनके नतीजों से वे अवगत नहीं हैं। बांबे हॉस्पिटल के वरिष्ठ ह्रदय रोग विशेषज्ञ अनिल शर्मा ने बताया कि आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में फास्टफूड हमारी सेहत पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। इससे दिल के दौरे की आशंका बढ़ती है। इसलिए खान पान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बड़े शहरों में दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल ढाई लाख से भी अधिक बच्चे जन्मजात दिल की बीमारियों के शिकार होते हैं। इनमें से दस प्रतिशत से भी कम का इलाज हो पाता है। शहर के जाने माने हार्ट सर्जन जेडए हमदुलै ने कहा, बीस से तीस साल की आयु वर्ग के बीच के लोगों में दिल की बीमारियां लगातार बढ़ रही है।

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