जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर सड़क, रेल जैसे बुनियादी ढांचागत क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता मिलने के असर के संकेत अब इनसे जुड़े संबंधित उद्योगों में भी मिलने लगे हैं। बीते कुछ महीनों में सीमेंट की बिक्री से प्रोत्साहित हो इस उद्योग में क्षमता विस्तार की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। उद्योग मान रहा है कि अगर सरकारी परियोजनाओं की रफ्तार यही बनी रही और सीमेंट की खरीद का सिलसिला बना रहा तो अगले तीन साल में उद्योग अपनी क्षमता में 5.60 करोड़ टन का इजाफा कर सकता है।

बीते दो साल में अर्थव्यवस्था की धीमी रफ्तार और औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर सुस्ती को देखते हुए इसे काफी उत्साहजनक माना जा सकता है। सड़क और अन्य क्षेत्रों में निर्माण परियोजनाओं के वापस रफ्तार पकड़ने के चलते सीमेंट की सरकारी खरीद में काफी इजाफा हुआ है। अब आगे भी सरकार ने उद्योग को भरोसा दिया है कि सीमेंट की खरीद का सिलसिला बदस्तूर जारी रहेगा।

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प्रधानमंत्री मोदी के 2022 तक सबके लिए आवास कार्यक्रम को सफल बनाने के लक्ष्य ने भी सीमेंट उद्योग को प्रोत्साहन दिया है। अंबुजा सीमेंट के एमडी व सीईओ अजय कपूर का मानना है कि सीमेंट की कुल मांग में अकेले हाउसिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 67 फीसद है। अकेले ग्रामीण क्षेत्रों में तीस लाख आवास की जरूरत है। कपूर मानते हैं कि अगर इस बार मानसून उम्मीद के मुताबिक अच्छा रहा तो ग्रामीण भारत की यह मांग और अधिक भी हो सकती है।

घरेलू अर्थव्यवस्था में सीमेंट की खपत बढ़ने की उम्मीद को देखते हुए कंपनियों ने सीमेंट उत्पादन की क्षमता बढ़ाने पर भी विचार करना शुरू कर दिया है। साल 2015 में देश में 27 करोड़ टन सीमेंट का उत्पादन हुआ। कंपनियां अपनी इस क्षमता को 2025 तक 55 करोड़ टन करना चाहती हैं। फिलहाल सीमेंट की मांग को देखते हुए अगले तीन साल में मौजूदा क्षमता में 5.60 करोड़ टन का इजाफा होने की संभावना है।

उद्योग का मानना है कि नई सड़कों निर्माण और पुरानी सड़कों के रखरखाव में सीमेंट की मांग अभी और बढ़ेगी। क्रंक्रीट रोड में सरकार के बढ़ते रुझान से इस मांग में और वृद्धि होगी। मार्च में आठ प्रमुख उद्योगों के प्रदर्शन में सुधार में सीमेंट उद्योग की भागीदारी भी प्रमुख रही है। इस महीने सीमेंट के उत्पादन में करीब 12 फीसद की वृद्धि दर्ज हुई है। उद्योग से जुड़े लोग मान रहे हैं कि सरकारी परियोजनाओं की रफ्तार और बढ़ी तो सीमेंट के उत्पादन में भी तेज वृद्धि संभव है।

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