नई दिल्ली (जागरण ब्यूरो)। देश की तीनों सेनाओं के बीच गुरुवार को पहली बार साझा संचार सेवा शुरू हो गई। यह 'रक्षा संचार नेटवर्क' (डीसीएन) विशेष तौर पर बनाया गया रणनीतिक, सुरक्षित और अत्याधुनिक संचार ढांचा है।

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर ने डीसीएन को राष्ट्र को समर्पित किया। इस मौके पर उन्होंने विशेष नेटवर्क की शुरुआत के लिए तीनों सेनाओं को बधाई देते हुए कहा कि इसे सुरक्षित बनाए रखने की जिम्मेवारी का भी गंभीरता से ध्यान रखना होगा। रक्षा मंत्रालय के लिए इसे आइटी कंपनी एचसीएल ने विकसित किया है। इस नेटवर्क के जरिए आवाज, डाटा और वीडियो एक साथ उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही मल्टीमीडिया प्रसारण भी किया जा सकेगा। लद्दाख जैसे बेहद ऊंचाई वाले क्षेत्रों सहित यह पूरे देश को कवर कर सकेगा।

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दिल्ली और मेरठ में दो विशेष डाटा केंद्र बनाए गए और सौ से ज्यादा सर्वर लगाए गए हैं। कार्यक्रम के दौरान पर्रीकर ने नेटवर्क पर सेनाओं के विभिन्न केंद्रों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सीधी बातचीत भी की। इस नेटवर्क के जरिए बिना किसी रुकावट के तीनों सैन्य बल आपस में सीधे जुड़ सकेंगे। विशेष नेटवर्क उन्हें बाहरी हमले या सूचना के लीक होने के खतरे से भी बचाएगा।

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सिग्नल ऑफिसर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली ने कहा कि खास तौर पर पिछले दो दशक के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी में जिस तेजी से बदलाव हो रहे हैं, उसे देखते हुए सैन्य बलों को भी नियमित रूप से इसका लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। इस आधुनिकतम ढांचे को खड़ा करने के लिए विदेशी कंपनियों की मदद नहीं ली गई। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि यह भारतीय तकनीक व उद्योग जगत की ताकत को दर्शाता है, साथ ही मेक इन इंडिया को ले कर सरकार की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है।

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Posted By: Kamal Verma

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