मणिपुर में शांति समझौते की छांव तले सुलगती आशंकाएं, सुरक्षा बलों ने कुकी-जो सोओ शिविर पर नियंत्रण किया
मणिपुर में सुरक्षा बलों ने कुकी-जो उग्रवादियों के एक सोओ शिविर पर नियंत्रण कर लिया, जहां 159 पंजीकृत कैडरों में से केवल एक ही मिला।
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मणिपुर हिंसा।
HighLights
सुरक्षा बलों ने कुकी-जो सोओ शिविर पर सीधा नियंत्रण किया।
शिविर में 159 में से केवल एक कैडर मौजूद मिला।
राज्य सरकार ने सभी 14 सोओ शिविरों के ऑडिट का निर्णय लिया।
डिजिटल डेस्क, इंफाल। मणिपुर में मई 2023 से सुलग रही जातीय हिंसा के बीच सुरक्षा बलों ने पहली बार एक बड़ा कदम उठाते हुए कुकी-जो उग्रवादियों के 'सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन' समझौते के तहत बने एक निर्धारित शिविर पर सीधा नियंत्रण कर लिया है।
कांगपोकपी जिले के सिनाई शिविर में की गई इस कार्रवाई के दौरान वहां पंजीकृत 159 कैडरों की जगह केवल एक ही कैडर मौजूद मिला, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और समझौते के नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बड़ी विसंगति के सामने आने के बाद अब राज्य सरकार ने सभी 14 शिविरों का व्यापक आडिट करने का निर्णय लिया है।
सिनाई शिविर में छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और अन्य युद्धक सामग्री बरामद की गई है। शिविर से 17 ऐसे लोग भी पकड़े गए जो पंजीकृत कैडरों की सूची में शामिल नहीं थे, जिन्हें अदालत ने पुलिस हिरासत में भेज दिया है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह जांच की जा रही है कि बाकी कैडर कहां गए और क्या नियमों का उल्लंघन हुआ है।
यह घटनाक्रम 19 अक्टूबर को नोंगशुम के पास तीन मीतेई नागरिकों की हत्या के ठीक बाद सामने आया है, जिसके बाद से घाटी और पहाड़ी समुदायों के बीच तनाव एक बार फिर गहरा गया है।
पिछले महीने चार सितंबर को 'सस्पेंशन आफ आपरेशन' समझौता बिना नवीनीकरण के समाप्त हो चुका है। हालांकि केंद्र सरकार ने अभी तक इस समझौते को आधिकारिक रूप से रद नहीं किया है, लेकिन शिविरों की इस अचानक हुई घेराबंदी ने मणिपुर की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
