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मणिपुर में जनगणना से पहले NRC से समर्थन में क्यों आई भाजपा और कांग्रेस?

Published: Thu, 03 Sep 2026 05:48 PM (IST)

मणिपुर में 2027 की जनगणना टाल दी गई है, क्योंकि मैतेई और नागा संगठनों ने पहले NRC की मांग की है, जिसे भाजपा और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त है।

मणिपुर में जनगणना से पहले NRC की मांग। (पीटीआई)

मणिपुर में जनगणना से पहले NRC की मांग। (पीटीआई)

HighLights

  1. मणिपुर में जनगणना टली, मैतेई-नागा संगठनों ने NRC की मांग की।

  2. भाजपा और कांग्रेस ने जनगणना से पहले NRC का समर्थन किया।

  3. कुकी संगठनों ने NRC का विरोध किया, विस्थापन पर चिंता जताई।

डिजिटल डेस्क, इंफाल। मणिपुर में 2027 की जनगणना को फिलहाल टाल दिया गया है। मैतेई और नागा संगठनों की मांग है कि पहले 'नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस' (NRC) हो, उसके बाद मतगणना। दोनों संगठनों की मांग का भाजपा और कांग्रेस ने भी समर्थन किया है।

इसके पीछे कई अहम कारण हैं, जिनमें घुसपैठ के आरोप, आबादी के बदलते संतुलन और भविष्य के परिसीमन की चिंता है। वहीं कुकी संगठनों ने इसका विरोध किया है।

अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मैतेई और नागा संगठन जनगणना से पहले एनआरसी क्यों चाहते हैं?

मैतेई और नागा संगठनों का दावा है कि म्यांमार से आए लोगों के कारण आबादी का स्वरूप बदला है। वे चाहते हैं कि पहले नागरिक और गैर-नागरिक की पहचान हो, फिर जनगणना में आबादी दर्ज की जाए।

म्यांमार से इसका क्या संबंध है?

म्यांमार में साल 2021 में सैन्य तख्तापलट के बाद हजारों लोग भारत आए। इनमें कई चिन समुदाय से हैं, जिनके कुकी समुदाय से संबंध हैं। इसी कारण यह मुद्दा मणिपुर में ज्यादा संवेदनशील है।

विस्थापन से जनगणना पर क्या असर पड़ेगा?

2023 की हिंसा के बाद लोग अपने गांवों से बाहर रह रहे हैं। संगठनों का कहना है कि अभी जनगणना हुई तो विस्थापन के बाद बदली आबादी रिकॉर्ड हो सकती है।

आखिर कुकी क्यों कर रहे NRC का विरोध ?

कुकी संगठनों का कहना है कि पहले जनगणना से सही आबादी का डेटा सामने आना चाहिए। पुराना कटऑफ रखा गया तो कई परिवारों की नागरिकता पर सवाल उठेंगे।

विधानसभा सीटों का गणित

मौजूदा समय में मणिपुर में 60 सीटें हैं, 40 घाटी में व 20 पहाड़ी इलाकों में। नई जनगणना के बाद परिसीमन हुआ तो सीटों का यह अनुपात बदल सकता है।

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