अहमदाबाद। लांचिंग के लगभग दो साल बाद भी भारत का मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) यानी मंगलयान अच्छी तरह से काम कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन एएस किरण कुमार ने बुधवार को यहां कहा कि अगले साल जनवरी में मंगलयान की कक्षा में कुछ सुधार किया जाएगा ताकि यह कई वर्षों तक काम करता रहे।

कुमार ने बताया कि मंगलयान की कक्षा में सुधार के जरिये उसकी बैटरी की जिंदगी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। यह इसलिए भी जरूरी है कि लंबे ग्रहण के दौरान भी मंगलयान को ऊर्जा मिलती रहे। आइआइटी गांधीनगर में एमओएम पर एक लेक्चर के दौरान कुमार ने कहा, "जनवरी में ग्रहण के दौरान 7-8 घंटे तक मंगल की छाया एमओएम पर पड़ेगी।

कक्षा में सुधार नहीं किया गया तो यह निस्तेज हो सकता है क्योंकि लंबे ग्रहण के दौरान बैटरी इसका साथ छोड़ सकती है। कक्षा में सुधार होने से बैटरी पर ग्रहण का असर आधा रह जाएगा, जिससे सेटेलाइट कई वर्षों तक काम करता रह सकता है। इसकी वजह से हमें मंगल ग्रह से जुड़ी गतिविधियों का अध्ययन करने में और समय मिल जाएगा।"

इसरो चेयरमैन ने कहा, लांच करते वक्त इस अभियान की उम्र सिर्फ छह माह रखी गई थी। आगामी 24 सितंबर को इसके दो साल पूरे हो जाएंगे। आने वाले कई वर्षों तक एमओएम के सभी पांच पेलोड से सूचनाएं हासिल करने के लिए हमारे पास अब भी पर्याप्त ईंधन है और इसकी सभी प्रणालियां बखूबी काम कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि इसरो अब अपने दूसरे चंद्र अभियान "चंद्रयान-दो" पर काम कर रहा है। इसे अगले साल के अंत या 2018 की शुरुआत में लांच किए जाने की योजना है।

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Posted By: Gunateet Ojha

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