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मनन कुमार मिश्रा की पावर हुई कम, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लोकतांत्रिक रूप से नहीं चुने गए थे

Published: Wed, 02 Sep 2026 06:03 PM (IST)Updated: Wed, 02 Sep 2026 10:54 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को 'प्रो-टेम चेयरमैन' घोषित किया है।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कम कीं मनन कुमार मिश्रा की ताकत

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कम कीं मनन कुमार मिश्रा की ताकत

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने मनन कुमार मिश्रा को 'प्रो-टेम चेयरमैन' घोषित किया।

  2. नई BCI के पदाधिकारी चुने जाने तक ही पद पर रहेंगे।

  3. बड़े नीतिगत फैसले AG और SG की सलाह से लिए जाएंगे।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। नलसार घटना के बाद विवादों में आए बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ) के अध्यक्ष मनन कुमार के कामकाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जब तक बीसीआई का नया गठन नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा व्यवस्था रोजमर्रा का कामकाज संभाल सकती है, लेकिन बीसीआई कोई भी नीतिगत फैसला भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल की सक्रिय भागीदारी के बिना नहीं लेगी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए ये भी कहा कि बीसीआइ अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा का पद सिर्फ तबतक प्रोटेम (अस्थायी) है जबतक कि वकीलों की संस्था नये पदाधिकारी नहीं चुन लेती।

ये टिप्पणियां और निर्देश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जोयमाल्या बाग्ची और वी मोहना की पीठ ने बीसीआइ अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के लंबे कार्यकाल की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिये।सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले ही कोर्ट ने नालसर यूनिवर्सिटी आफ लॉ के वर्ष 2026 के स्नातक छात्रों से जुड़े विवाद में बीसीआइ के हस्तक्षेप करने पर सवाल उठाए थे।

उस मामले में बीसीआइ अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने शुरुआत में राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि वे उन छात्रों का नामांकन न करें, क्योंकि छात्रों ने दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश को आमंत्रित किये जाने का विरोध किया था। बाद में बीसीआइ ने छात्रों के नामांकन पर लगाई गई रोक वापस ले ली थी और अंतत: छात्रों के खिलाफ कार्रवाई भी बंद कर दी थी। इसके बाद मिश्रा ने अपने शब्दों या बीसीआई की कार्रवाई से छात्रों को पहुंची ठेस के लिए माफी भी मांगी थी। आज मामले में मुख्य विवाद वर्ष 2025 में बीसीआइ द्वारा जारी उन अधिसूचनाओं को लेकर था, जिनके जरिए अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा और उपाध्यक्ष एस. प्रभाकरण का कार्यकाल पांच साल तक किये जाने की बात है।

याचिकाकर्ता की वकील माधवी दीवान ने कहा कि बीसीआइ के नियम 12(2) में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल दो साल निर्धारित है।नौ जनवरी 2025 के एक प्रस्ताव के जरिए अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल से बढ़ा कर पांच साल कर दिया गया। मनन मिश्रा का कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल 2030 तक का है। इस पर पीठ ने सवाल किया कि जब नियमों में दो साल का कार्यकाल तय है तो किस प्रविधान के तहत इस तरह का विस्तार हो सकता है।

सुनवाई के दौरान वकील गोपाल शंकरनारायण ने ट्रस्ट के गठन का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस नये गठित ट्रस्ट में बीसीआइ में सदस्य के तौर पर कार्यकाल की परवाह किये बगैर ट्रस्ट में 11 स्थाई मैनेजिंग ट्रस्टी बनाए गए हैं। जिसमें बीसीआइ के अध्यक्ष औ उपाध्यक्ष शामिल हैं। आरोप लगाया कि बीसीआइ की संपत्ति और आय ट्रस्ट में ट्रांसफर की गई है। कोर्ट ने इस पर पूछा कि बीसीआइ एक कानूनी इकाई है और चुने हुए लोग खुद को हमेशा के लिए ट्रस्टी कैसे बना सकते हैं।

कोर्ट ने सभी को सुनने के बाद निर्देश दिया कि नयी बनी राज्य बार काउंसिलें अपनी को-आप्शन (सह चयन) प्रक्रिया पूरी करेंगी और बीसीआइ के लिए नये प्रतिनिधि चुनेंगी। कोर्ट ने कहा कि नयी गठित राज्य बार काउंसिल अपने गठन की अधिसूचना के तीन हफ्ते के भीतर अपने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष अन्य पदाधिकारियों और बार काउंसिल आफ इंडिया के एक प्रतिनिधि का चुनाव करेंगी। मामले पर अगली सुनवाई 23 सिंतबर को होगी।