TMC नाम और सिंबल फ्रीज करने के खिलाफ SC पहुंचीं ममता बनर्जी, EC के फैसले को दी चुनौती
ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को जब्त करने के चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम ...और पढ़ें

चुनाव चिह्न और नाम बचाने सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी
HighLights
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को अस्थायी रूप से जब्त किया गया।
नंदीग्राम में ममता की प्रत्याशी ने नाम वापस लेकर दिया झटका।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनाव से पहले राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को दो बड़े झटके लगे है। पार्टी के भीतर बगावत के चलते चुनाव आयोग ने गुरुवार रात उनकी पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न (दो फूलों के साथ घास) अंतिम फैसला आने तक जब्त कर लिया था।
वहीं शुक्रवार को नंदीग्राम सीट से उनके गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान ने अपना नाम वापस लेकर उन्हें एक और बड़ा झटका दिया है। उपचुनाव को देखते हुए आयोग ने तृणमूल के दोनों गुटों से नाम व चुनाव चिह्न को लेकर तीन-तीन विकल्प मांगे थे।
दोनों गुटों की ओर से विकल्प मुहैया कराए जाने के बाद आयोग ने उन्हें नया नाम व चुनाव चिह्न आवंटित कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची ममता बनर्जी
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न के प्रयोग पर चुनाव आयोग द्वारा अंतरिम रोक लगाए जाने के फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी पर ममता बनर्जी और अरुप रॉय वाले दोनों गुटों द्वारा दावा पेश किए जाने के बाद आयोग ने 17 सितंबर को यह आदेश जारी किया था।
आयोग ने ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और चुनाव चिह्न ‘फुटबाल खिलाड़ी’ दिया है। ऋतब्रत बनर्जी वाले बागी गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और चुनाव चिह्न ‘लिफाफा’ दिया गया है।
बंगाल में दोनों सीटों के लिए छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में दोनों गुट इन नामों और चुनाव चिह्न के साथ मैदान से उतरेंगे।
चुनाव आयोग ने लगाई थी रोक
इससे पहले आयोग ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस व उसके चुनाव चिह्न पर दावेदारी से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को अंतिम निर्णय आने तक जब्त करने का फैसला लिया था। चुनाव आयोग ने कहा कि यह अंतरिम व्यवस्था विशेष रूप से आगामी उपचुनावों के लिए बनाई गई है। यह तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक विवाद का अंतिम समाधान नहीं हो जाता।
ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने के चुनाव आयोग के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। कोलकाता में अपने आवास पर संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए ममता ने इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन बताया। कहा कि वह इस फैसले को स्वीकार नहीं करेंगी और राजनीतिक, लोकतांत्रिक तथा कानूनी तरीके से लड़ाई जारी रखेंगी।
ममता बनर्जी के लिए पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न जब्त होने के बाद नंदीग्राम से उनके गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान का मैदान से हटना बड़ा झटका है। प्रधान ने यह एलान तब किया, जब नामांकन की अंतिम तारीख समाप्त हो चुकी है। अब ममता कोई दूसरा प्रत्याशी भी मैदान में नहीं उतार सकती हैं।
यही वजह है कि उन्होंने अब नंदीग्राम सीट से कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का एलान किया है। ऐसे में अब सभी की नजरें रेजीनगर पर टिकी हैं, क्योंकि अभी नाम वापसी की अंतिम तारीख 19 सितंबर तक है।
अहम रही है चुनाव चिह्न की भूमिका
1998 में ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद से ही ‘दो फूलों के साथ घास’ चुनाव चिह्न ने पार्टी के सफर में अहम भूमिका निभाई है। चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग का आदेश विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल विधायक दल में हुई बगावत के बाद आया है।
जून में 58 विधायकों ने ममता गुट के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय की जगह पार्टी से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुन लिया और स्पीकर से मान्यता हासिल की। तृणमूल के 28 साल के इतिहास में यह पहली फूट थी।
पांच दिन बाद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 लोकसभा सदस्यों ने भी बगावत का झंडा उठा लिया और कम जानी-पहचानी एनसीपीआइ का दामन थाम लिया।
