'पागलों का समूह है कांग्रेस', खरगे की पीएम मोदी पर टिप्पणी से भड़के निशिकांत दुबे
प्रधानमंत्री मोदी पर टिप्पणी को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
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निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को 'पागलों का समूह' बताया।
HighLights
निशिकांत दुबे ने कांग्रेस को 'पागलों का समूह' बताया।
पीएम मोदी पर अमर्यादित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर हमला।
केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने भी कांग्रेस की निंदा की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर अमर्यादित टिप्पणी से भड़के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर जमकर प्रहार किया।
निशिकांत ने कांग्रेस को "पागलों का समूह" करार देते हुए कहा कि पार्टी लगातार चुनावी हार से उबर नहीं पा रही है और उसका पूरी तरह पतन हो चुका है।
उन्होंने 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के बाद का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिकी नेताओं हेनरी किसिंजर और रिचर्ड निक्सन द्वारा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर की गई अभद्र टिप्पणियों के खिलाफ संसद में अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी जैसे विपक्षी दिग्गजों ने देश की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए उनका पुरजोर बचाव किया था।
निशिकांत दुबे ने कहा कि तब राष्ट्र के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया गया था, जबकि आज कांग्रेस नेताओं की भाषा उनका असंतुलित मानसिक संतुलन दर्शाती है।
उन्होंने दावा किया कि 100 से अधिक चुनाव हारने और अगले 10 से 20 साल तक विपक्ष में बैठने की हताशा के कारण कांग्रेस नेता इस तरह का व्यवहार कर रहे हैं, और मल्लिकार्जुन खरगे से लेकर राहुल गांधी तक पूरा शीर्ष नेतृत्व इसी मानसिकता से ग्रस्त है।
दूसरी ओर, वरिष्ठ जदयू नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने भी 1974 के आपातकाल विरोधी और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की राजनीतिक मर्यादा को याद करते हुए खरगे के बयानों की कड़ी निंदा की। उन्होंने हैरानी जताई कि कांग्रेस अध्यक्ष जैसे जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति किस तरह शालीनता की सभी सीमाएं लांघ रहा है।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि या तो यह उम्र का असर है या मानसिक अस्वस्थता, क्योंकि प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी भाषा की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि 1974 में इंदिरा गांधी के शासन के खिलाफ कड़ा संघर्ष करने के बावजूद विरोधियों ने कभी भी उनके प्रति अभद्र या अपमानजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया था, जो उस दौर के राजनीतिक शिष्टाचार को दर्शाता है।
(न्यूज एजेसी ANI के इनपुट के साथ)
