नई दिल्ली। ज्यों-ज्यों चुनाव नजदीक आ रहे हैं अपने संसदीय क्षेत्रों को लेकर सांसदों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं। रेल मंत्रालय से संबद्ध संसदीय सलाहकार समिति की शुक्रवार को हुई बैठक में ज्यादातर सांसदों ने अपने क्षेत्र में रोड ओवरब्रिज/अंडरब्रिज (आरओबी/आरयूबी) की जरूरत पर जोर दिया। यह अलग बात है कि रेलमंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने धन की कमी के चलते राज्य सरकारों पर ठीकरा फोड़ उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

खड़गे ने कहा कि देश में कुल 31,252 रेलवे क्रासिंग हैं, जिनमें 18,662 (60 फीसद) पर चौकीदार तैनात हैं, जबकि बाकी 12,582 (40 फीसद) बगैर चौकीदार के हैं। दुर्घटना में मौत के सबसे ज्यादा मामले इन्हीं क्रासिंगों पर होते हैं। उन्होंने बताया कि मौजूदा नियमों के मुताबिक अगर किसी क्रासिंग पर ट्रेन व्हिकल यूनिट्स (टीवीयू-किसी क्रासिंग से 24 घंटे में गुजरने वाली ट्रेनों तथा सड़क वाहनों का गुणनफल) एक लाख से ज्यादा है, तो वहां आरओबी/आरयूबी बनाया जा सकता है। बशर्ते राज्य सरकार या स्थानीय निकाय परियोजना पर 50 फीसद खर्च करने को राजी हो। खड़गे ने कहा कि उन्होंने सभी राज्य सरकारों से रेल परियोजनाओं, खासकर रोड ओवरब्रिज/अंडरब्रिजों में हिस्सेदारी निभाने को लिखा है। यह भी तय हुआ है कि अगर कोई राज्य सरकार पीपीपी के तहत आरओबी/आरयूबी का निर्माण कराना चाहती है तो रेलवे अपने हिस्से की पूरी भरपाई करेगा।

खड़गे ने कहा रेलवे अपनी नई लाइन, आमान परिवर्तन, दोहरीकरण, विद्युतीकरण आदि से जुड़ी परियोजनाओं के लिए धन की कमी का सामना कर रहा है। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने वित्त मंत्रालय से भी अनुरोध किया है और राज्य सरकारों को भी कहा है। ज्यादातर सांसदों ने अपने संसदीय क्षेत्रों में बन रहे आरओबी/आरयूबी की सुस्त रफ्तार पर भी चिंता जताई और रेलमंत्री से काम में तेजी लाने के निर्देश देने का अनुरोध किया।

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