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दो साथी अफसरों की पत्नियों से थे अवैध संबंध, मेजर को बर्खास्त करेगी सेना

Published: Sat, 17 Oct 2026 07:23 PM (IST)

भारतीय सेना एक मेजर को साथी अफसरों की पत्नियों से अवैध संबंध रखने के आरोप में बर्खास्त करने की तैयारी ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सेना एक मेजर को बर्खास्त करने की तैयारी में है। मेजर पर साथी अफसरों की पत्नियों के साथ अवैध संबंध रखने समेत कई गंभीर आरोप हैं। सेना ने इस मामले में कोर्ट-मार्शल कराने के बजाय प्रशासनिक कार्रवाई का रास्ता चुना है।

अधिकारी ने इस प्रक्रिया को रुकवाने के लिए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल की दिल्ली स्थित प्रिंसिपल बेंच का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन ट्रिब्यूनल ने राहत देने से इनकार कर दिया है।

कोर्ट-मार्शल के बिना बर्खास्तगी का नोटिस

सेना ने 10 अगस्त को आर्मी रूल्स 19 और 14 के तहत मेजर को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें पूछा गया कि मौजूदा परिस्थितियों में कोर्ट-मार्शल कराना व्यावहारिक नहीं है, ऐसे में उन्हें सीधे सेवा से बर्खास्त क्यों न कर दिया जाए?

जस्टिस राजेंद्र मेनन और लेफ्टिनेंट जनरल सीपी मोहंती की बेंच ने इस कार्रवाई पर रोक लगाने से इनकार करते हुए मेजर को निर्देश दिया कि वे अपनी आपत्तियां नोटिस के जवाब में ही दर्ज कराएं।

हालांकि, ट्रिब्यूनल ने सेना को आदेश दिया है कि वह मेजर को कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की जांच रिपोर्ट और चार्ज हियरिंग की कार्यवाही के दस्तावेज सौंपे, जिसकी मांग मेजर लगातार कर रहे थे।

पूर्व पत्नी की शिकायत से शुरू हुआ विवाद

यह मामला अगस्त 2023 में शुरू हुआ था, जब मेजर की तत्कालीन पत्नी ने सेना मुख्यालय के अनुशासन एवं सतर्कता निदेशालय में शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में मेजर पर व्यभिचार (अडल्ट्री), नशाखोरी और परिवार की अनदेखी के आरोप लगाए गए थे। साथ ही यह दावा भी किया गया था कि उनके चार महिलाओं से संबंध थे, जिनमें से दो सेना के ही साथी अफसरों की पत्नियां थीं। इसके बाद अक्टूबर 2023 में 55 (I) मैकेनाइज्ड ब्रिगेड मुख्यालय ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी बैठाई।

मेजर ने प्रक्रिया पर उठाए सवाल

मेजर ने शुरुआत से ही जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि सेना ने आर्मी रूल 180 का उल्लंघन किया है, जो किसी भी अधिकारी की साख और सैन्य प्रतिष्ठा की रक्षा करता है।

मेजर का दावा है कि जिन महिलाओं और उनके पतियों पर आरोप थे, उन्हें बार-बार अनुरोध के बावजूद कभी गवाही के लिए नहीं बुलाया गया। उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप, पेन ड्राइव जब्त करने और उनके आवास की तलाशी लेने में तय नियमों की अनदेखी की गई।

सेना ने मार्च 2025 में आर्मी एक्ट की धारा 45 और 63 के तहत एक संभावित चार्जशीट तैयार की थी। इसके बाद साक्ष्यों का सारांश दर्ज किया गया और अंत में कोर्ट-मार्शल के बजाय प्रशासनिक बर्खास्तगी का नोटिस थमा दिया गया।

तलाक के बाद पत्नी ने वापस ली शिकायत

मेजर ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 30 मार्च 2026 को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश से उनका आपसी सहमति से तलाक हो चुका है।

समझौते के तहत उनकी पूर्व पत्नी ने अगस्त 2023 की अपनी शिकायत वापस ले ली। पूर्व पत्नी ने लिखित में कहा कि वैवाहिक तनाव और कड़वाहट के कारण यह शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसका कोई ठोस आधार नहीं था।

मेजर ने तर्क दिया कि शिकायत वापस होने के बाद उन्हें बर्खास्त करने का मामला कानूनी तौर पर और कमजोर हो जाता है। ट्रिब्यूनल ने कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग खारिज करते हुए मेजर को कारण बताओ नोटिस का औपचारिक जवाब दाखिल करने को कहा है।