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जब देश की राष्ट्रपति का 'मां' वाला रूप देख पिघल गया सुरक्षाकर्मी का दिल, मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने सुनाई अनसुनी दास्तान

Published: Sat, 12 Sep 2026 12:12 AM (GMT+05:30)

पूर्व राष्ट्रपति ADC मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने राज शामानी के साथ एक इंटरव्यू में अपने अनुभव साझा किए।

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने सुनाई अनसुनी दास्तान।

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने सुनाई अनसुनी दास्तान।

HighLights

  1. ADC का काम प्रोटोकॉल, समन्वय और राष्ट्रपति की जरूरतों का ध्यान रखना।

  2. राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए 1 किलोमीटर का इलाका सुरक्षित किया जाता है।

  3. मेजर संब्याल ने राष्ट्रपति मुर्मु के साथ मां जैसा आत्मीय रिश्ता महसूस किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ज्यादातर लोगों लिए 'एडे-डी कैंप' (ADC) बस वदी पहने हुए वह अधिकारी होता है जो किसी VVIP के साथ चलता हुआ दिखता है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के पूर्व ADC, मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने अब उन तस्वीरों की पीछे की असलियत के बारे में बताया है।

राज शामानी से बात करते हुए, संब्याल ने नौकरी की चुनौतियों, राष्ट्रपति की सुरक्षा, अपनी ट्रेनिंग और राष्ट्रपति मुर्मु के साथ बने खास और आत्मीय रिश्ते के बारे में चर्चा की।

राष्ट्रपति का ADC क्या करता है?

ADC सिर्फ दिखावे के लिए साथ रहने वाला साथी नहीं होता। यह अधिकारी प्रोटोकॉल संभालने, जरूरतों के बीच तालमेल बिठाने और सरकारी कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रपति की जरूरतों का पहले से अंदाजा लगाकर तैयार रहने में मदद करता है।

संब्याल ने अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए बताया कि अगर राष्ट्रपति मुर्मु, प्रधानमंत्री से बात करना चाहती थीं, तो ADC संबंधित लोगों के साथ तालमेल बिठाता था ताकि बातचीत हो सके। सबसे मुश्किल काम सभी लोगों को एक साथ लाना या एक ही बात पर सहमत करना होता है। इस नौकरी में हर समय सतर्क रहना पड़ता है क्योंकि राष्ट्रपति के कार्यक्रम के दौरान छोटी-छोटी बातें भी मायने रखती हैं।

इतनी ज्यादा सतर्कता की जरूरत क्यों होती है?

संब्याल ने बताया कि राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर तैयारी की जाती है। उन्होंने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति के आने-जाने के दौरान उनके आस-पास लगभग 1 किलोमीटर के इलाके को सुरक्षित किया जाता है, जहां हथियार, धातु की चीजें और अन्य संभावित खतरों को दूर रखा जाता है।

उनकी अपनी ट्रेनिंग में चीजों को बारीकी से देखने और समझने की क्षमता को चरम सीमा तक परखा जाता था। उन्होंने ऐसी एक्सरसाइज के बारे में बताया जिनमें खाना, पानी और नींद से वंचित रखा जाता था और उसके बाद ऑब्जर्वेशन टेस्ट होते थे। रास्ते में जान-बूझकर कुछ चीजें रखी जाती थीं और बाद में अधिकारियों से पूछा जाता था कि उन्होंने क्या देखा।

सबक साफ था। ADC सिर्फ यह नहीं देख सकता कि क्या हो रहा है। अधिकारी को वह भी देखना होता है जो शायद दूसरे न देख पाएं।

राष्ट्रपति के दौरों का दबाव

आम जनता आमतौर पर राष्ट्रपति के दौरे का व्यवस्थित और शानदार पहलू ही देखती है। ADC उसके पीछे की तैयारी को देखता है। संब्याल ने अलग-अलग जगहों पर राष्ट्रपति के दौरों, प्रोटोकॉल और सुरक्षा जरूरतों को संभालने के बारे में बात की। उनके अनुभव से पता चलता है कि इस पद के लिए सैन्य अनुशासन और सामाजिक समझ, दोनों की जरूरत क्यों होती है।

ADC को बिना दखल दिए पास रहना होता है। अधिकारी सेना का प्रतिनिधित्व करता है, प्रोटोकॉल का सम्मान करता है और कुछ ही सेकंड में प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार रहता है।

राष्ट्रपति मुर्मु के साथ संब्याल का रिश्ता

राष्ट्रपति मुर्मु के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए संब्याल ने कहा कि उनसे पहली मुलाकात में मुझे अपनी मां की याद आ गई। मिलिट्री सर्विस की वजह से अपनी मां से सालों दूर रहने के कारण, उन्हें राष्ट्रपति का अपनापन बहुत जाना-पहचाना लगा।

लगभग तीन साल के कार्यकाल के दौरान यह रिश्ता और मजबूत होता गया। उन्होंने याद करते हुए कहा कि उनका स्वभाव बहुत घरेलू था। उन्होंने ADC के साथ जो अपनापन दिखाया, उससे मुझे अपनी मां की याद आ गई।

इस बात से कहानी और भी मानवीय बन जाती है। औपचारिक तस्वीरों और कड़े प्रोटोकॉल के पीछे एक ऐसा रिश्ता था जिसे संब्याल ने सच्चे स्नेह के साथ महसूस किया।

संब्याल ने लगभग 12 साल की सर्विस के बाद आर्मी छोड़ दी। उन्होंने इस फैसले को अपनी जिंदगी के सबसे मुश्किल फैसलों में से एक बताया। ADC के तौर पर उनके कार्यकाल ने उन्हें ऑनलाइन भी काफी पहचान दिलाई थी।

डिस्क्लेमर: यह खबर राज शमानी के साथ इंटरव्यू के दौरान मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के बयानों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है।

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