इंदौर (नईदुनिया)। सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने वाली स्पेशल फोर्स से लेकर राष्ट्रपति के सुरक्षा दस्ते में रह चुके मेजर (रिटायर्ड) डॉ. सुरेंद्र पुनिया का कहना है कि पता नहीं सरकार की ऐसी कौन सी राजनीतिक मजबूरी है कि कश्मीर में सीज फायर करना पड़ रहा है। मैं मोदी का प्रशंसक हूं लेकिन सरकार की कश्मीर नीति का नहीं। सैनिकों के हाथ बांध दिए गए हैं। यदि ऐसा ही रहा तो लोग अपने बच्चों को सेना में नहीं भेजेंगे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आमंत्रण पर शनिवार को शहर पहुंचे मेजर डॉ. पुनिया ने कहा, सीज फायर तब होना चाहिए जब सामने वाला कहे। यह कोई धर्मयुद्ध नहीं कि शंख बजे और सब तंबू में चले गए। आतंकवादी कश्मीर में इस्लामिक राज्य स्थापित करना चाहते हैं। रमजान में सीज फायर क्यों? ऐसे तो एक सैनिक कहेगा कि अभी दशहरा है तो सीज फायर करो, अभी गुरु पर्व है तो सीज फायर करो। ऐसा होगा तो हम लड़ेंगे कब, शांति कब स्थापित होगी। सेना के हाथ बांध दिए गए हैं। इससे तो अच्छा कि हुर्रियत को दिल्ली बुलाकर बिरयानी खिलाएं, जो पहले होता रहा है।

ऐसे बढ़े पत्थरबाजों के हौसले

डॉ. पुनिया के मुताबिक पत्थरबाजों को पुलिस पकड़ती है और उन्हें माफी मिल जाती है। मैं अपने साथियों को बचाने के लिए फायर करता हूं तो मुझ पर केस चलाकर जेल में डाल दिया जाता है। सरकार ने सेना के हाथ बांध दिए हैं। यह जनता है जो पिछले सालों में हमारे साथ बैठकर खाती थी जयहिंद बोलती थी, आज पत्थर मार रही है।

ये हैं डॉ. पुनिया मेजर 

डॉ. सुरेंद्र पुनिया एएफएमसी से प्रशिक्षित डॉक्टर हैं। न केवल स्पेशल फोर्स के ऑफिसर बल्कि राष्ट्रपति के सुरक्षा दस्ते में रहे। यूएन के शांति मिशन में कांगो में तैनात रहे। वे सेना के सबसे ज्यादा मेडल से सजे मेजर माने जाते हैं। पॉवर लिफ्टिंग और एथलेटिक्स में भारत के लिए लगातार चार स्वर्ण पदक जीतने के कारण उनका नाम लिम्का बुक ऑफ व‌र्ल्ड रिकॉ‌र्ड्स में भी दर्ज है। घायल व शहीद सैनिकों की मदद के लिए उन्होंने सोल्जराथॉन नामक सालाना मैराथन इवेंट भी शुरू किया।

Posted By: Arti Yadav

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