नई दिल्ली (कमल कान्त वर्मा)। इंदौर से पटना जा रही एक्सप्रेस के कानपुर के आगे पुखरायांं में दुर्घटनाग्रस्त हो जानेे की वजह जानने के लिए कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (पू र्वी जोन) पीके आचार्य के नेतृृत्व में जांच शुरू हो गई है। इस ट्रेन हादसे की वजह को लेकर कई बातें सुनने में आ रही हैं, लेकिन इसकी हकीकत जांच के बाद ही सामने आ पाएगी। लेकिन ऐसे कुछ खास बिंदु हैं जिनपर इस हादसे की जांच टिकी रह सकती है। घटनास्थल कानपुर से लगभग 60 किमी और पुखरायां स्टेशन से करीब 200 मीटर दूरी पर है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इसके पीछे जिम्मेदार लोगों को माफ न करने की बात भी कही है।

हादसे के पीछे आतंकी कार्रवाई

रेलवे सेफ्टी की जांच इस बात को लेकर भी की जाएगी कि कहीं किसी ने नुकसान पहुंचाने के मकसद से पटरियों के साथ छेड़-छाड़़ तो नहीं की। हालांकि इस बात की गुंजाइश काफी कम है, लेकिन जांच का एक बिंदु यह भी जरूर होगा। इस दौरान भी पटरी में आई खामी को तलाशा जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि इसमें थोड़ी भी सच्चाई दिखाई देती है यह वास्तव में बड़े खतरे का संकेत होगा। लिहाजा इसके लिए सरकार को बड़े स्तर पर काम करना होगा और अपनी नीति बनानी होंगी।

ट्रेन में खराबी

हादसे की जांच के दौरान सबसे पहले इस बात की जांच की जाएगी कि इंदौर-पटना एक्सप्रेस केे चलने से पहले जांच की गई थी या नहीं। इस दौरान यात्रियों की उन शिकायतों को भी ध्यान में रखा जाएगा जिसमें यात्रियों ने ट्रेन से लगातार तेज आवाज आने की शिकायत टीटी को की थी। शिकायत के बाद दो बार ट्रेन को रुकवाकर देखा भी गया था, लेकिन दिक्कत का पता न चलने की वजह से इसको आगे जाने की इजाजत दी गई थी। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की जांच में यह भी तय किया जाएगा कि यदि ट्रेन की जांच चलने से पहले की गई थी तो यात्रियों ने इस तरह की शिकायत क्यों की। ट्रेन की जांच में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे और उनकी रिपोर्ट इस बाबत क्या कहती है।

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पटरी में दरार

ट्रेन हादसे को लेकर शुरुआती कारणों में पटरी में आई दरार को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। लेकिन अब चूंकि हादसे की जांच शुरू कर दी गई है तो यह देखा जाएगा कि इसमें कितनी सच्चाई है। दरअसल ट्रेन की पटरियों की लगातार जांच की जाती है। इसके लिए बाकायदा अल्ट्रासाउंड मशीन का इस्तेमाल भी किया जाता है, जो ट्रेन की पटरियों में आई मामूली दरार को भी बता देती है। इसके बाद इस दरार को तुरंत मौके पर ही दुरुस्त कर दिया जाता है। रेल की पटरियों पर यह निरंतर चलने वाली प्रकिया है। इस दौरान कई रेलवे के कर्मी लगातार पटरियों का निरीक्षण करते हैं और साथ ही रेल की पटरियों में एक दूसरे को जोड़ने वाले पेच को भी जरूरत पड़ने पर टाइट करते हैं। ऐसे में यदि पटरी में आई दरार की बात सच हुई तो यह जरूर देखा जाएगा कि पटरी की नियमित जांच क्यों नहीं हुई या फिर इसमें कोताही क्यों बरती गई। यह भी देखा जाएगा कि यदि जांच हुई तो पटरी मेंं आई दरार को क्यों नहीं देखा जा सका। लिहाजा यहां सीधेतौर पर रेलवे कर्मी से लेकर अधिकारियों तक से जवाब लिया जाएगा। कहा जा रहा है कि पटरी में दरार के लगातार बढ़ते रहने की वजह से यह हादसा हुआ है। इस बात की सच्चाई कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी की जांच में सामने आ जाएगा।

बाेगियों को जोड़ने वाली शंटिंग का लूज होना

हादसे की वजह का तीसरा बड़ा कारण दो बोगियों को आपस में जोड़ने वाली शंटिंग का ठीक से न होना भी हो सकता है। आपने भी कई बार दो बोगियों को आपस में जोड़ने वाली इस जगह पर गौर जरूर किया होगा। यहां पर बाकायदा लिखा होता है कि 'कृप्या लूज शंटिंग न करें'। इसकी वजह सिर्फ यही है कि ऐसा होने पर बोगियां ठीक तरह से एक दूसरे से बंधकर नहीं चल पाती हैं और ऐसे में हादसे की गुंजाइश बनी रहती है। ऐसे में यदि ट्रेन की कोई भी बोगी बेेपटरी होती है तो उसके पीछे की बोगियां भी बेपटरी होती चली जाती हैं। ऐसे में यदि ट्रेन स्पीड मेंं होती है कोच एक दूसरे के ऊपर चढ़ जाते हैं और बड़ा हादसा हो जाता है। लिहाजा इस बिंदु पर भी जांच की जाएगी। इसकी जिम्मेदारी निचले स्तर के रेल कर्मी के अलावा अधिकारी की भी होती है जो लगातार लूज शंटिंग न हो, इसकी जांच करता है और बाद में क्िलियरेंस भी देता है।

अधिकारियों की लापरवाही

जिस वक्त यह हादसा हुआ उस समय ट्रेन की रफ्तार 110 किमी प्रति घंटा थी। यात्रियों के मुताबिक झांसी से चलते ही ट्रेन में तेज आवाज आने लगी थी। यात्रियों ने इसकी ट्रेन के संबंधित स्टाफ को भी दी थी। जिसके बाद दो जगहों पर ट्रेन को रोका भी गया था। लेकिन अधिकारियों ने ट्रेन को कानपुर सेंट्रल स्टेशन लाने का फरमान सुनाया था। गाड़ी के चालक जलत शर्मा के बयान इस बात की लगातार पुष्टि कर रहे हैं। इस बिंदु पर जांच करते समय यह देखा जाएगा कि इस हादसे के पीछे कहीं अधिकारियों की लापरवाही तो नहीं रही है।

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Edited By: Kamal Verma