नई दिल्ली, जेएनएन। महाशिवरात्रि पर इस साल कुछ ऐसे संयोग बने हैं जो भक्तों के लिए बहुत ही शुभ फलदायी हैं। इस दिन शिवजी की पूजा से जहां मुक्ति का मार्ग बनेगा वहीं महालक्ष्मी और देवी पार्वती की कृपा से धन और वैवाहिक जीवन के सुखों में वृद्धि का योग रहेगा। आइए जानें महाशिवरात्रि पर यह महासंयोग कैसे बना है?

21 फरवरी को मनाया जाएगा महाशिवरात्रि

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शुक्रवार 21 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व मनाया जाएगा। ज्योतिष में जब सूर्य कुंभ राशि और चंद्र मकर राशि में होता है, तब फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की रात ये पर्व मनाया जाता है। 21 फरवरी की शाम 5.22 बजे तक त्रयोदशी तिथि रहेगी, उसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी। शिवरात्रि रात्रि का पर्व है और 21 फरवरी की रात चतुर्दशी तिथि रहेगी।

महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग

21 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन सर्वार्थ सिद्धि नामक शुभ योग भी बना हुआ है। इस शुभ योग को ज्योतिषशास्त्र में सभी अशुभ बाधाओं को दूर करने वाला कहा गया है। इस योग में कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। इसके अलावा भोग-मोक्ष की प्राप्ति के लिए शिव उपासना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जप, हवन करवाना भी कल्याणकारी रहेगा। पूजन के लिए और नए कार्यों की शुरुआत करने के लिए यह योग बहुत ही शुभ माना गया है।

जीवन में केवल 1 बार मिलता है यह संयोग

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर ज्योतिषशास्त्र में बताए गए 5 महायोगो में से दो महायोग भी बन रहा है। शनि के अपनी राशि में होने से शश नामक योग रहेगा जबकि गुरु के खुद की राशि में होने से हंस नामक राजयोग रहेगा। इन योगों की एक साथ उपस्थिति होने पर महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव की पूजा करना बड़ा ही दुर्लभ माना गया है। ऐसा संयोग फिर 59 साल बाद ही बनेगा। यानी आपके जीवन में ऐसा संयोग महज एक बार ही होने वाला है। इस विधि से करेंगे पूजा तो शिव हर लेंगे सारे दु:ख।

117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग

इस बार 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग शिवरात्रि पर बन रहा है। शनि अपनी स्वयं की राशि मकर में और शुक्र ग्रह अपनी उच्च राशि मीन में रहेगा। ज्योतिषाचार्य़ों के मुताबिक यह एक दुर्लभ योग है। 25 फरवरी 1903 को ठीक ऐसा ही योग बना था। इस साल गुरु भी अपनी राशि धनु में है। इस योग में शिव पूजा करने पर शनि, गुरु, शुक्र के दोषों से भी मुक्ति मिल सकती है।

विष योग से दूर होंगे सारे कष्ट

शिवरात्रि पर शनि के साथ चंद्र भी रहेगा। शनि-चंद्र की युति की वजह से विष योग बन रहा है। शिवरात्रि पर विष योग करीब 28 साल पहले 2 मार्च 1992 को बना था। इस योग में शनि और चंद्र के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए। कुंडली में शनि और चंद्र के दोष दूर करने के लिए शिव पूजा करने की सलाह दी जाती है।

बुध-आदित्य और सर्प योग भी रहेंगे शिवरात्रि पर

बुध और सूर्य कुंभ राशि में एक साथ रहेंगे। इस वजह से बुध-आदित्य योग भी बनेगा। इसके अलावा इस दिन सभी ग्रह राहु-केतु के मध्य रहेंगे, इस वजह से सर्प भी बन रहा है। शिवरात्रि पर राहु मिथुन राशि में और केतु धनु राशि में रहेगा। शेष सभी ग्रह राहु-केतु के बीच रहेंगे।

 

Posted By: Sanjeev Tiwari

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