अतिरिक्त पानी की मांग पर अटका महानदी जल विवाद पर समझौता, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच तल्खी बरकरार
बैठक में ओडिशा ने गैर मानसून अवधि में पनबिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त पानी की मांग की, जिसे छत्तीसगढ़ ने ...और पढ़ें

अतिरिक्त पानी की मांग पर अटका महानदी जल विवाद पर समझौता (फाइल फोटो)
HighLights
गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक, दोनों राज्यों ने रखा अपना पक्ष
ओडिशा ने गैर मानसून अवधि में पनबिजली उत्पादन के लिए मांगा अतिरिक्त पानी
जेएनएन, रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच 43 वर्षों से चल रहे महानदी जल विवाद के समाधान के लिए गुरुवार को नई दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में कर्तव्य भवन में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा।
बैठक में ओडिशा ने गैर मानसून अवधि में पनबिजली उत्पादन के लिए अतिरिक्त पानी की मांग की, जिसे छत्तीसगढ़ ने अस्वीकार कर दिया। इस कारण दोनों राज्यों के बीच समझौता नहीं हो सका। अब दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाने की पहल की जा रही है।
बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महानदी हमें बांटने वाली नहीं है। दोनों राज्यों को जोड़ने वाली जीवनधारा है, समाधान ऐसा हो जिसमें दोनों राज्यों की जीत हो।
उन्होंने कहा कि न्यायपूर्ण एवं स्थायी समाधान के लिए छत्तीसगढ़ पूरी तरह प्रतिबद्ध है। छत्तीसगढ़ अपने हितों की बात करते हुए ओडिशा की आवश्यकताओं और हितों का भी पूरा सम्मान करता है। हीराकुंड ओडिशा की जीवनरेखा है और छत्तीसगढ़ उसके महत्व को भलीभांति समझता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ हीराकुंड जलाशय के हितों और उसके सुचारु संचालन के लिए आवश्यक सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।
