'आरएसएस को जम्मू-कश्मीर में मार्च की अनुमति, तो यहां क्यों नहीं'; मद्रास HC की विजय सरकार को फटकार
'जब जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में RSS को मार्च की अनुमति है, तो फिर तमिलनाडु में बार-बार पाबंदी क्यों लगाई ...और पढ़ें

मद्रास हाईकोर्ट का तमिलनाडु सरकार से सवाल।
HighLights
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को लगाई फटकार।
आरएसएस मार्च पर बार-बार पाबंदी पर उठाए सवाल।
सरकार को शांतिपूर्ण आयोजन के लिए निर्देश दिए।
डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के रूट मार्च पर तमिलनाडु सरकार ने पाबंदी लगा दी, जिसके बाद यह मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुंचा।
ऐसे में जब इस मामले में सुनवाई हुई तो मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु की विजयर सरकार जमकर फटकार लगाई और तीखे सवाल भी पूछे।
तमिलनाडु में रोक क्यों- हाईकोर्ट
कोर्ट ने इस मामले में तमिलनाडु सरकार के पाबंदी लगाने के फैसले पर सवाल खड़े किए। इसके बाद उच्च न्यायालय ने सख्त लहजे में सवाल किया कि जब जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाकों में भी आरएसएस के मार्च की अनुमति है, तो आखिर तमिलनाडु में इस पर बार-बार रोक क्यों लगाई जाती है?
रैलियों की अर्जियों को ठुकराने की आलोचना
इसी दौरान मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने तमिलनाडु सरकारी की तरफ से मार्च और रैलियों की अर्जियों को बार-बार ठुकराए जाने की मौखिक रूप से आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसलों से संगठनों को मजबूरन अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, जिससे अनावश्यक मुकदमों की संख्या बढ़ती है।
वैचारिक मतभेद को लेकर भी खड़े किए सवाल
इसके अलावा न्यायाधीश ने इस बात पर भी गौर किया कि सरकार ने द्रविड़ कड़गम और आरएसएस समेत वैचारिक रूप से अलग-अलग विचारधारा वाले कई संगठनों को रैलियों की अनुमति देने से इनकार किया है। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि विरोध प्रदर्शनों और जुलूसों की अनुमति मांग रहे नागरिकों को सरकार एक दुश्मन के रूप में देख रही है।
हाईकोर्ट का तमिलनाडु सरकार को निर्देश
अंत में मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं और आयोजकों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण जुलूस और जनसभा के लिए उचित व्यवस्था व तौर-तरीके तय करे। कोर्ट ने सरकार से इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाने को कहा है।
