भोपाल, जेएनएन। अस्पतालों में भर्ती कोरोना रोगियों पर आयुर्वेदिक दवाओं का परीक्षण स्वास्थ्य और आयुष विभाग की अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा। इलाज के तौर पर भी कोविड अस्पतालों में काढ़ा, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाएं और अन्य औषधियां नहीं दी जा सकेंगी। अंग्रेजी और आयुर्वेदिक दवाओं को साथ खाने से शरीर पर क्या असर पड़ेगा, इस संबंध में अभी कोई अध्ययन नहीं है। लिहाजा, मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने इस पर रोक लगा दी है।

इस संबंध में स्वास्थ्य संचालनालय में अपर संचालक डॉ. वीणा सिन्हा ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। पिछले हफ्ते राज्य तकनीकी सलाहकार समिति की बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर यह निर्देश सभी कलेक्टरों और सीएमएचओ को जारी किए गए हैं। बता दें कि आयुष अस्पतालों को भी कोविड केयर केंद्र बनाया गया है, जहां मरीजों को एलोपैथी के साथ आयुर्वेदिक व होम्योपैथी दवाएं भी दी जा रही हैं। कुछ जगह ट्रायल भी हो रहे हैं।

निर्देश में कहा गया है कि कई मरीजों को 100 डिग्री बुखार होने पर भी सीटी स्कैन की रिपोर्ट में बीमारी गंभीर देखने को मिल रही है। लिहाजा, इतने बुखार को भी हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। होम आइसोलेशन में हैं तो इसकी सूचना चलित चिकित्सा यूनिट को दी जाए। फौरन कोविड अस्पताल जाएं। 

होम आइसोलेशन के पैमाने

- अस्पतालों से मरीजों को होम आइसोलेशन में तभी भेजा जाए, जब सैंपल लेने या लक्षण दिखने के सात दिन पूरा होने के बाद पिछले तीन दिन से बिना दवा खाए बुखार नहीं आया हो।

- पिछले चार दिन से मरीज का ऑक्सीजन का स्तर 95 फीसद से ज्यादा हो और सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं हो रही हो।

-मरीजों को जरूरत के अनुसार ही ऑक्सीजन दी जाए, क्योंकि अधिक मात्रा होने से अन्य परेशानियां होती हैं।

हमीदिया में होगा रेमडेसिविर के असर का अध्ययन

सलाहकार समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है, उन्हें रेमडेसिविर इंजेक्शन मरीज या स्वजन की सलाह पर लगाया जा सकता है। इस इंजेक्शन से अभी तक मरीजों को कितना फायदा हुआ है, इसका अध्ययन हमीदिया अस्पताल, भोपाल के डॉक्टर करेंगे।

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