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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जिसे जेल जाना था उसे मिली बेल, जिसे मिलनी थी बेल उसे हो गई जेल... एमपी हाईकोर्ट में बड़ी गलती

Published: Wed, 13 Aug 2025 10:51 AM (IST)

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक टाइपिंग की गलती से जमानत के मामले में उलटफेर हो गया। वेबसाइट पर अपलोड किए ...और पढ़ें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक टाइपिंग की गलती से मची हलचल (फाइल)
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक टाइपिंग की गलती से मची हलचल (फाइल)

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया, यहां एक टाइपिंग की गलती से उस आरोपी को जमानत मिल गई, जिसे जमानत नहीं मिलनी थी और उसकी जमानत खारिज हो गई जिसे जमानत मिलती थी। हालांकि, बाद में इस भूल को सुधार लिया गया।

दरअसल, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक छोटी सी टाइपिंग एरर ने जमानत के पूरे खेल को ही पलट कर रख दिया। कोर्ट वेसबाइट पर अपलोड किए आदेश में जिस आरोपी की जमानत अर्जी खारिज हुई थी और दूसरे आरोपी, जिसकी जमानत अर्जी मंजूर की गई, उनके नाम आपस में बदल गए।

टाइपो एरर से मिली गलत आदमी को जमानत

कोर्ट में वेबसाइट पर हुई इस गलती से पूरे परिसर में हलचल मचा दी। पता चला कि जनानत अर्जी दाखिल करने वाले कोई और नहीं बल्कि हत्या के शक में गिरफ्तार पिता-पुत्र थे। जिन्हें पिछले साल 5 जुलाई को विदिशा के त्योंदा में दुकानदार प्रकाश पाल की पीट-पीटकर हत्या करने के शक में गिरफ्तार किया गया था।

आदेश में गड़बड़ी से मची कोर्ट में हलचल

जब तक यह गड़बड़ी पकड़ी गई, हल्के के वकील अमीन खान वेबसाइट पर दी गई गलत जानकारी के आधार पर बेल बांड जमा कर चुके थे। हल्के को रिहा करने का आदेश जेल अधिकारियों को भी जारी कर दिया गया था। लेकिन हल्के की ये खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई क्योंकि अदालत के कर्मचारियों ने उनके वकील को बताया कि आदेश में गड़बड़ी है।

कोर्ट सुधारी गलती, जारी किया नया आदेश

गड़बड़ी का पता लगने के कुछ ही घंटे बाद, ग्वालियर पीठ के जज राजेश कुमार गुप्ता ने गलत छपे आदेश को वापस ले लिया, जिसमें जिनमें हल्के को जमानत पर रिहा करने और उनके बेटे अशोक को जेल में रखने का जिक्र था।

सोमवार को दोबारा सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कि टाइपिंग की गलती के कारण यह गड़बड़ी हुई थी। गलती को सुधारते हुए कोर्ट ने नया आदेश जारी किया।

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