नई दिल्ली। भाजपा की आपत्तियों बावजूद रक्षा मंत्रालय नए सेना प्रमुख की नियुक्ति प्रक्रिया पर आगे बढ़ रहा है। मंत्रालय ने वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग का नाम सेना प्रमुख के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा है। हालांकि, मामले को तूल पकड़ता देख रक्षा मंत्रालय ने इस संदर्भ कोई फाइल आगे बढ़ाने की खबरों से इन्कार किया है।

आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को बताया कि रक्षा मंत्रालय के इस प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति से स्वीकृति लेनी होगी। परंपरा के मुताबिक, सरकार नये सेना प्रमुख के नाम की घोषणा सेना प्रमुख के सेवानिवृत्ति के दो माह पहले करती है। इसे देखते हुए नए सेना प्रमुख के नाम की घोषणा एक मई तक हो जाने की उम्मीद है। जनरल बिक्रम सिंह 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं, इस तरह अभी तीन माह हैं। जनरल बिक्रम सिंह की नियुक्ति भी उनके पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह के सेवानिवृत्त होने के तीन माह पहले ही की गई थी। ज्ञातव्य है कि वीके सिंह के रिश्ते रक्षा मंत्रालय से खराब हो गए थे और उम्र विवाद पर उन्होंने मंत्रालय को सुप्रीम कोर्ट तक खींचा था।

रक्षा मंत्रालय ने यह कदम तब भी उठाया है जब विपक्ष दल भाजपा ने कहा है जिस सरकार का शासनकाल खत्म हो रहा हो उसे सेना प्रमुख की नियुक्ति नहीं करनी चाहिए। यह काम नई सरकार पर छोड़ देना चाहिए जो उम्मीद है कि मई के अंत तक सत्ता संभाल लेगी। भाजपा ने नियुक्ति की इस प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए चुनाव आयोग को याचिका भी दी है। भाजपा की ओर से गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे पूर्व सेना प्रमुख वीके सिंह ने कहा है कि संप्रग सरकार को नए सेना प्रमुख की नियुक्ति में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों जनरल सिंह ने लेफ्टिनेंट जनरल सुहाग पर कमान के नियंत्रण की नाकामी को लेकर कुछ प्रतिबंध भी लगाए थे। आरोप था कि सुहाग के नेतृत्व वाली खुफिया इकाई असम के जोरहाट मेंडकैती में लिप्त थी। जनरल बिक्रम सिंह की नियुक्ति के बाद सुहाग पर से प्रतिबंध हटाया गया और उन्हें पूर्वी कमान का कमांडर नियुक्त किया गया।

पढ़ें : ले. जनरल सुहाग मामले में रक्षा मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस