होर्मुज में फंसे हैं LPG से लदे जहाज: ईरान से चल रही भारत की बात, अमेरिका-रूस से आई गुड न्यूज
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण भारत में एलपीजी आपूर्ति को लेकर चिंता बनी हुई है, हालांकि एक जहाज पहुंचा ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जयप्रकाश रंजन, जागरण। मंगलवार सुबह एलपीजी से लदा एक और जहाज भारतीय तट पर पहुंच गया, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत में रसोई गैस (एलपीजी) की आपूर्ति को लेकर चिंता बरकरार है।
सरकार के विभिन्न मंत्रालयों की ओर से आयोजित एक उच्चस्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ संकेत दिए गए कि मौजूदा हालात अभी स्थिर नहीं हैं और अगले कुछ दिनों के भीतर बाहर से एलपीजी टैंकर भारतीय रिफाइनरियों पर नहीं पहुंचते हैं तो आने वाले दिनों में संकट और बढ़ सकता है।

ईरान के साथ बातचीत जारी
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने मंगलवार को दो बार दोहराया कि देश में एलपीजी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। होर्मुज जलडमरुमध्य में फंसे एलजीपी व क्रूड टैंकर से लदे एक दर्जन भारतीय जहाजों की स्थिति मंगलवार देर रात खबर लिखे जाने तक अस्पष्ट थी, हालांकि विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस बारे में ईरान के साथ बातचीत की जा रही है।
- सरकार की तरफ से बताया गया है कि होर्मुज मार्ग से एलपीजी से लदा जहाज शिवालिक मुंद्रा पोर्ट पर मंगलवार सुबह 2.30 बजे पहुंच गया। सोमवार शाम को एक और एलपीजी वाहक जहाज पहुंचा था। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इनसे केवल सीमित और अस्थायी राहत ही मिल पाएगी।
- भारत की विशाल खपत के मुकाबले इन जहाजों की आपूर्ति बेहद कम है। देश में रोजाना करीब 60 हजार टन एलपीजी की जरूरत होती है, जबकि उक्त दोनों जहाजों में संयुक्त तौर पर 93 हजार टन एलपीजी होने की बात सामने आई है। इससे दीर्घकालिक राहत की उम्मीद नहीं की जा सकती।
- दीर्घकालिक राहत तभी मिलेगी जब होर्मुज पूरी तरह से खुल जाए या दूसरे समुद्री मार्ग से एलपीजी की आपूर्ति लगातार शुरू हो जाए। खाड़ी क्षेत्र के कई एलपीजी उत्पादक देशों की स्थिति भी स्पष्ट है और उनके दर्जनों एलपीजी टैंकर विभिन्न बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं। एलपीजी की आवक को लेकर स्पष्टता का नहीं होना एक बड़ी समस्या है।

घरेलू एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका से एलपीजी खरीदा गया है लेकिन अमेरिकी एलपीजी के भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचने में चार से पांच हफ्ते का समय लगता है। रूस से एलएनजी खरीदने की भी सूचना है लेकिन उसे एलपीजी में बदलने की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें अतिरिक्त समय लगेगा। ऐसे में राहत की एक मात्र बात यह है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहले ही फौरी तौर पर देश की रिफाइनरियों को घरेलू एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता देने की बात कही है। सोमवार तक रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन 38 फीसद तक बढ़ा दिया गया है।
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पेट्रोलियम मंत्रालय का डाटा
- समस्या यह है कि घरेलू उत्पादन सीमित स्तर तक ही बढ़ाया जा सकता है। भारत घरेलू जरूरत का 60 फीसद आयात करता है और 40 फीसद घरेलू स्तर पर उत्पादित करता है। आयात होने वाले कुल एलपीजी का 90 फीसद होर्मुज मार्ग से आता है।
- पेट्रोलियम मंत्रालय का डाटा बताता है कि अप्रैल, 2025 से फरवरी, 2026 तक भारत ने 1.89 करोड़ मैट्रिक टन एलपीजी आयात किया है और 1.1 करोड़ मैट्रिक टन एलपीजी उत्पादन किया है।
- सूत्रों का कहना है कि पश्चिम एशिया तनाव के बाद दुनिया में दो सबसे बड़े उपभोक्ता देश चीन व भारत की तरफ से एलपीजी खरीदने की कोशिश हो रही है। भारतीय कंपनियों को सौदा का अंतिम रूप देने में चीनी कंपनियों की आक्रामक बिडिंग का सामना करना पड़ रहा है।
फौरन पीएनजी पाइपलाइन बिछाने के प्रस्ताव को मिलेगी मंजूरी
पश्चिम एशिया समस्या ने जिस तरह से एलपीजी को लेकर चिंता पैदा की है उसको देखते हुए सरकार ने पूरे देश में पीएनजी बिछाने के काम को युद्ध स्तर पर लागू करने का फैसला किया है। राज्यों को कहा गया है कि वो मौजूदा हालात में पीएनजी पाइपलाइन बिछाने व कनेक्शन देने के नियमों को ज्यादा से ज्यादा उदार बनायें।
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सभी राज्यों को निर्देश
- पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव शर्मा ने कहा कि एलपीजी की स्थिति चिंताजनक है। लेकिन एलपीजी की आपूर्ति व डिलीवरी की स्थिति पहले की तरह बना कर रखा गया है।
- पीएनजी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। इस क्रम में सभी राज्यों को निर्देश दिया गया है कि पीएनपी पाइपलाइन बिछाने के पुराने सभी प्रस्तावों को तत्काल मंजूरी दें।
- जो नये प्रस्ताव आएं उन्हें 24 घंटे में मंजूरी दें। पाइपलाइन बिछाने की जो नीतियां हैं उनको तत्काल उदार बनाएं और संबंधित अधिकारियों की तुरंत नियुक्ति करें। देश में 33 करोड़ एलपीजी कनेक्शन धारक हैं जबकि 1.5 करोड़ ही पीएनजी कनेक्शन हैं।
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