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'पर्याप्त स्टॉक' के बावजूद बढ़ गई एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत, क्या है इसकी वजह?

Published: Sat, 07 Mar 2026 07:01 PM (IST)Updated: Sat, 07 Mar 2026 07:41 PM (IST)

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की आशंकाओं के बीच भारत में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ...और पढ़ें

HighLights

  1. घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपये महंगा, अब 913 रुपये।

  2. पश्चिम एशिया युद्ध, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर मुख्य कारण।

  3. सरकार ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाने, कालाबाजारी रोकने के निर्देश दिए।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर उसके असर की आशंकाओं के बीच भारत में घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी कर दी है।

सरकारी क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) की वेबसाइट के अनुसार, 14.2 किलोग्राम का गैर-सब्सिडी वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब दिल्ली में 913 रुपये का हो गया है, जो पहले 853 रुपये का था। यह पिछले 11 महीनों में दूसरी बार बढ़ोतरी है।

इससे पहले अप्रैल 2025 में कीमतों में 50 रुपये की वृद्धि की गई थी। आपूर्ति बाधित होने की संभावनाओं को देखते हुए अंदरखाने सतर्कता बढ़ा दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का भी निर्देश दिया गया है।

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर भी पड़ेगा असर

एलपीजी कीमत बढ़ने से प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर भी असर पड़ेगा। हालांकि उन्हें प्रति सिलेंडर 300 रुपये की सब्सिडी मिलती है, जिसके बाद अब उन्हें 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर के लिए 613 रुपये चुकाने होंगे। यह नई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई हैं। घरेलू गैस के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमत भी बढ़ाई गई है।

कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 114.5 रुपये की बढ़ोतरी

होटल, रेस्तरां और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 114.5 रुपये बढ़कर 1,883 रुपये हो गई है। इससे पहले 1 मार्च को भी इसमें 28 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी।

इस तरह इस साल कमर्शियल सिलेंडर की कीमत कुल 302.50 रुपये बढ़ चुकी है।इसी बीच एलपीजी वितरकों का कहना है कि उन्हें मौखिक तौर पर गैस सिलेंडरों की आपूर्ति और वितरण पर करीबी नजर रखने को कहा गया है।

ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए सतर्कता के निर्देश

अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर सिलेंडरों की संभावित ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वितरकों के मुताबिक, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग का अंतराल बढ़ाकर 21 दिन करने को कहा गया है, जबकि अभी तक यह 15 दिन था।

इसके अलावा कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति और वितरण पर भी कड़ाई बरतने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बढ़ती कीमतों और संभावित आपूर्ति बाधा के बीच किसी तरह की कालाबाजारी या जमाखोरी न हो।

सरकार ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का दिया निर्देश

ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने के लिए सरकार ने एहतियाती कदम भी उठाए हैं। केंद्र ने शुक्रवार को आपात शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए देश की तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है ताकि संभावित वैश्विक आपूर्ति व्यवधान की स्थिति में घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी

ओएमसी के अधिकारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद पैदा हुए सैन्य टकराव के कारण वैश्विक ऊर्जा कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के चलते की गई है।

इस संघर्ष के कारण ईरान और ओमान के बीच स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस ले जाने वाले टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में से एक है।

कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल

सनद रहे कि युद्ध के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। अमेरिकी कच्चा तेल पिछले एक हफ्ते में 35 प्रतिशत से अधिक बढ़कर करीब 90.90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जबकि ब्रेंट क्रूड लगभग 28 प्रतिशत उछलकर 92.69 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बंद हुआ।

एशियाई बाजार में एलएनजी की स्पॉट कीमत भी दोगुनी से भी ज्यादा बढ़कर करीब 25.40 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू (गैस मापने का मापक) हो गई है, जो तीन साल का उच्चतम स्तर है।

3,000 कार्गो जहाज और टैंकर फंसे

अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, होर्मुज मार्ग के अवरूद्ध होने से तकरीबन 3,000 कार्गो जहाज, टैंकर वगैरह विभिन्न बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं, जिसमें 3,00 तेल व गैस के टैंकर हैं। भारत के कुल प्राकृतिक गैस आयात का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा भी इसी रास्ते से गुजरता है।

एलपीजी के मामले में इस जलमार्ग का महत्व और ज्यादा है। भारत ने 2024-25 में लगभग 3.13 करोड़ टन एलपीजी की खपत की, जिसमें से केवल 1.28 करोड़ टन घरेलू उत्पादन था और बाकी आयात करना पड़ा।

आयातित एलपीजी का लगभग 85-90 प्रतिशत हिस्सा सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों से आता है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत पहुंचता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में वर्ष 2024-25 में एलपीजी की खपत में 3.13 करोड़ टन (5 फीसद की वृद्धि) रही थी जिसमें 65 फीसद बाहर से आयात किया गया था।

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