राजस्थान: कोटा में बुजुर्ग बाघिन महक की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सक्रियता पर होगा अध्ययन
राजस्थान में कोटा जिले के अभेड़ा बायोलाजिकल पार्क की बुजुर्ग बाधिन "महक" की 23 वर्ष लंबी उम्र के बावजूद उसकी ...और पढ़ें

कोटा में बुजुर्ग बाघिन महक की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सक्रियता पर होगा अध्ययन
HighLights
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक करेंगे अध्ययन
कोटा के अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क की बुजुर्ग बाधिन है महक
जागरण संवाददाता, जयपुर। राजस्थान में कोटा जिले के अभेड़ा बायोलाजिकल पार्क की बुजुर्ग बाधिन "महक" की 23 वर्ष लंबी उम्र के बावजूद उसकी सक्रियता और स्वास्थ्य के पीछे छिपे वैज्ञानिक कारणों के बारे में जानकारी हासिल करने को लेकर अध्ययन किया जाएगा।
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (डब्लयूआइआइ) के विज्ञानी और राज्य सरकार के वन विशेषज्ञ इसका अध्ययन करेंगे।
अध्ययन में इस बाघिन की जेनेटिक संरचना, डीएनए, शरीर में चलने वाली प्रक्रियाओं वैक्सीनेशन, खान-पान और स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा।
साथ ही यह जानने का भी प्रयास होगा कि क्या महक के शरीर में कोई विशेष जीन मौजूद है, जिसके कारण से बढ़ती उम्र के बावजूद महक बुढ़ापे से जुड़ी बीमारियों से बची हुई है।
आमतौर पर बाघ-बाघिना की उम्र 18 साल के आसपास होती है। जंगल में शिकार, दूसरे जानवरों से संघर्ष सहित कई कारणों से इनकी उम्र कम भी हो सकती है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, महक का जन्म 28 अगस्त 2004 को जयपुर के नाहरगढ़ बायोलाजिकल पार्क में हुआ था। उसे वहां से वर्ष 2012 में अभेड़ा बायोलाजिकल पार्क लाया गया था।
खुले जंगल में उसने कभी समय नहीं बिताया। वह देश की सबसे बुजुर्ग बाधिनों में शामिल है। महक से पहले सबसे अधिक लंबे समय तक जीवित रहने वाली बाघिन गुवाहाटी चिड़ियाघर की स्वाति थी, जिसकी 20 वर्ष की उम्र में मौत हुई थी।
महक को लेकर वन विभाग एक डाक्यूमेंट्री तैयार करवा रहा है, जिसमें उसके जन्म से लेकर 23 वर्ष की उम्र तक का पूरा ब्यौरा होगा। यह पार्क में लगी स्क्रीन पर पर्यटकों को दिखाया जाएगा।- प्रमोद धाकड़, जिला वन अधिकारी, कोटाबाघिन के प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं। पर्यटकों में यह काफी लोकप्रिय है।- संजय शर्मा, वनमंत्री राजस्थान सरकार
