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लोकसभा में अब सिर्फ अपनी सीट पर बैठकर ही लगेगी सांसदों की अटेंडेंस, हॉल या लॉबी में रहे तो हो जाएंगे Absent

Published: Wed, 21 Jan 2026 09:07 AM (IST)

लोकसभा सांसदों के लिए नया अटेंडेंस सिस्टम लागू होगा, जिसके तहत उन्हें अपनी निर्धारित सीट से ही हाजिरी लगानी होगी। ...और पढ़ें

स्पीकर ओम बिरला का जोर इस बात पर है कि हाजिरी सिर्फ संसद परिसर में मौजूद होने का सबूत नहीं होनी चाहिए।

स्पीकर ओम बिरला का जोर इस बात पर है कि हाजिरी सिर्फ संसद परिसर में मौजूद होने का सबूत नहीं होनी चाहिए।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा सांसदों के लिए अब नया अटेंडेंस सिस्टम आ गया है। बजट सत्र से अब वे सिर्फ अपनी निर्धारित सीट पर बैठकर ही अपनी हाजिरी दर्ज करा पाएंगे। लॉबी या बाहर से हाजिरी लगाने की पुरानी छूट पूरी तरह खत्म हो रही है।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को लखनऊ में 86वीं अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों की सम्मेलन के दौरान यह बड़ा ऐलान किया। उनका साफ कहना है कि संसद में गंभीरता और अनुशासन लाना जरूरी है और यह कदम उसी दिशा में उठाया गया है।

संसद में अक्सर देखा जाता है कि विपक्षी सांसद किसी मुद्दे पर हंगामा करके कई दिनों तक कार्यवाही रोक देते हैं। अब ऐसी स्थिति में भी सांसद हाजिरी नहीं लगा पाएंगे। हाउस चल रहा हो, तभी सीट पर बैठकर ही अटेंडेंस मार्क होगी। अगर सदन स्थगित हो गया तो हाजिरी का कोई रास्ता नहीं बचेगा। यह बदलाव 28 जनवरी से शुरू होने वाले बजट सत्र से लागू होगा।

सांसदों की असली भागीदारी अब होगी पारदर्शी

स्पीकर ओम बिरला का जोर इस बात पर है कि हाजिरी सिर्फ संसद परिसर में मौजूद होने का सबूत नहीं होनी चाहिए। यह सांसद की सक्रिय भागीदारी को दर्शाए ये मुहिम होनी चाहिए। इसलिए अब लोकसभा कक्ष में हर सीट पर पहले से ही लगे डिजिटल कंसोल से ही सांसद अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। बाहर लॉबी या गलियारे में खड़े होकर या बैठकर हाजिरी लगाने का दौर अब पूरी तरह खत्म हो गया है।

संसदीय परंपराओं में एकरूपता लाने की तैयारी

स्पीकर ओम बिरला ने सम्मेलन में यह भी बताया कि पूरे देश की विधानसभाओं और संसद में नियमों व परंपराओं को एक समान बनाने के लिए एक कमिटी गठित की गई है। इससे अलग-अलग राज्यों की विधानसभाओं में एकरूपता आएगी और वे आपस में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी। विभिन्न मापदंडों पर यह प्रतिस्पर्धा विधायी निकायों की गुणवत्ता बढ़ाएगी।

उन्होंने कहा कि एक जवाबदेह, समावेशी और भविष्योन्मुखी विधायिका ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत रख सकती है। ऐसी संसद और विधानसभाएं ही जनता का भरोसा जीत सकती हैं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख बढ़ा सकती हैं।

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