कोलकाता, जागरण ब्यूरो। बंगाल में अब तक भाजपा को कमजोर मानने वाली स्थानीय पार्टियां इस लोकसभा चुनाव में उसे हलके में लेने की भूल नहीं करेंगी। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की हवा और बदली परिस्थितियों के बीच बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी इसे लेकर सतर्क हैं। वर्ष 2009 से 2013 तक हर चुनाव में भारी जीत दर्ज करने वाली तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी का मानना है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को गंभीरता से लेना पड़ेगा। वे हिंदीभाषी वोटरों को मोदी के पक्ष में जाने से रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं।

दो दिन पहले माझेरहाट में मारवाड़ी समाज के कार्यक्रम में ममता ने हिंदी में कहा था 'मैं तो आप लोगों के बीच की व्यक्ति हूं।' तृणमूल प्रमुख की यह रणनीति गैर-बंगाली वोटरों को अपने पक्ष में करने का प्रयास माना जा रहा है। कारण, पिछले माह तक हुए कई जनमत सर्वेक्षणों में भाजपा का मत प्रतिशत बढ़ा हुआ दर्शाया गया है। यही वजह है कि ममता अपने भाषणों में अब भाजपा को भी खास अहमियत दे रही हैं। गत दिनों उत्तर बंगाल के इटाहार व मालदा में उन्होंने भाजपा को सांप्रदायिक बताते हुए राज्य को बांटने का आरोप लगाया था। बृहस्पतिवार को मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद में भी उन्होंने भाजपा को एक भी वोट नहीं देने की अपील की और दोहराया कि भाजपा केंद्र में आई तो बंगाल को बांटने का कार्य करेगी। इस बाबत तृणमूल प्रमुख ने अपने कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दे दिए हैं। पिछले दिनों टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही इमाम बरकती ने बयान दिया था कि ममता को धर्मनिरपेक्षता प्रमाणित करने के लिए मोदी पर कड़ा प्रहार करना होगा। माना जा रहा है कि मुस्लिम वोट के लिए ही ममता अब मोदी पर ज्यादा हमलावर हो गई हैं।

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