जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली । देश की बैंकिंग दुनिया का यह बड़ा सच है कि हजारों लोग या कंपनियां बैैंकों से कर्ज लेते हैं और फिर उसे जान बूझ कर नहीं चुकाते। लेकिन अब एक नया सच यह सामने आया है कि जब उस कर्ज की वसूली इन ग्र्राहकों की परिसंपत्तियों को जब्त कर की जाती है तो वही ग्र्राहक पिछले दरवाजे से इसे खरीदने की कोशिश में जुट जाता है। बैैंकों के भारी भरकम फंसे कर्जे (तकरीबन 9.5 लाख करोड़ रुपये) की वसूली मे जुटे सरकारी अमले को जब कारपोरेट सेक्टर में हो रहे इस तैयारी का पता चला तो उसने समय रहते ही इसका समाधान निकाल लिया। गुरुवार को सरकार की तरफ से जारी अध्यादेश में इस बात की पुख्ता व्यवस्था की गई है कि जान बूझ कर कर्ज नहीं चुकाने वाले लोग या कंपनियां अपनी ही जब्त परिसंपत्तियों को दोबारा नहीं खरीद सके।
केंद्र सरकार इन संशोधन के लिए इंसॉल्वेंसी व बैैंक्रप्सी कोड (आईबीसी) में सदन के अगल सत्र में बिल पेश करेगी। अध्यादेश इसलिए लाया गया है कि अभी 12 कंपनियों की परिसंपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया प्राथमिकता के तौर पर नेशलन कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) में चल रही है। इसमें एस्सार स्टील, भूषण स्टील, मोनेट इस्पात, लैंको इंफ्राटेक, इलेक्ट्रोस्टील जैसी कंपनियां हैैं। इनकी खरीदारों के लिए देशी-विदेशी कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है। माना जा रहा है कि इनमें से कुछ कंपनियों के प्रवर्तकों ने दूसरी कंपनियों के जरिए अपनी ही जब्त परिसंपत्तियों को खरीदने की कोशिश में थी। लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा कि एक ही कंपनी को दिवालिया कर उसके प्रवर्तक अपनी परिसंपत्तियों को कम कीमत पर दोबारा खरीद ले।

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ऐसे संदेहास्पद प्रवर्तकों या उनकी कंपनियों या पार्टनरशिप फर्म को इस तरह की परिसंपत्तियों में बोली लगाने की अनुमति नहीं मिलेगी। अध्यादेश में कहा गया है कि 'उन लोगों को बाहर रखा जाएगा तो जान बूझ कर कर्ज नहीं चुकाते हैैं या एनपीए से जुड़े हुए हैं।जानकारों का कहना है कि यह संशोधन काफी व्यापक है और अगर सही पालन हो तो कोई भी कंपनी अपनी पुरानी संपत्ति नहीं खरीद पाएगी।


संशोधन ने इंसॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया (आइबीबीआइ) को और ज्यादा अधिकार देने का रास्ता साफ कर दिया है। आइबीबीआइ को दोषी पाये जाने वाले व्यक्तियों पर दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी अधिकार दे दिया गया है। इससे इसकी ताकत बढ़ गई है।

बहरहाल, कई कंपनियों ने कहा है कि वे सरकार की परिभाषा के मुताबिक जान बूझ कर कर्ज नहीं लौटाने वाले (विल फुल डिफॉल्टर्स) नहीं है। एस्सार स्टील, भूषण स्टील, लैैंको इंफ्राटेक ने कहा है कि उनकी कंपनियां विल फुल डिफॉल्टर्स नहीं है। ये कंपनियां सरकार की अनुमति के साथ अपनी जब्त परिसंपत्तियों की बोली लगाने को तैयार है। जबकि देश की एक बड़ी स्टील कंपनी जेएसडब्लू स्टील के अध्यक्ष सज्जन जिंदल ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। माना जाता है कि कुछ स्टील कंपनियों की परिसंपत्तियों पर जेएसडब्लू की नजर है।

Posted By: Sachin Bajpai