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    मध्य प्रदेश में मंत्री विजय शाह की तरह संतोष वर्मा के विरुद्ध भी कार्रवाई में टाल-मटोल, कांग्रेस ने भी साधा मौन

    Updated: Sat, 29 Nov 2025 07:19 AM (IST)

    ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ीं सैन्य अधिकारी सोफिया कुरैशी पर विवादास्पद टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के आदिवासी होने के कारण उनके विरुद्ध राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं की गई, ठीक वैसे ही आइएएस अधिकारी संतोष वर्मा के मामले में हो रहा है। 

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    मध्य प्रदेश में मंत्री विजय शाह की तरह संतोष वर्मा के विरुद्ध भी कार्रवाई में टाल-मटोल (फाइल फोटो)

    जेएनएन, भोपाल। ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ीं सैन्य अधिकारी सोफिया कुरैशी पर विवादास्पद टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के आदिवासी होने के कारण उनके विरुद्ध राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई नहीं की गई, ठीक वैसे ही आइएएस अधिकारी संतोष वर्मा के मामले में हो रहा है।

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     संतोष के खिलाफ कार्रवाई में सरकार हिचकिचा रही है

    संतोष अनुसूचित जाति, जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) का अध्यक्ष है, ऐसे में सरकार अजाक्स या एससी-एसटी वर्ग से नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती है। यही वजह है कि ब्राह्मण बेटियों पर असभ्य टिप्पणी करने वाले संतोष के खिलाफ कार्रवाई में सरकार हिचकिचा रही है।

    मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में उनके विरुद्ध एफआइआर करने के लिए थानों में दिए गए आवेदनों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है, जबकि उनका बयान सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने वाला है।

    इसी आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग को उन्हें नोटिस देना पड़ा है, लेकिन इससे आगे कोई कार्रवाई न होने से ब्राह्मण समाज नाराज है और चेतावनी दी है कि यदि एफआइआर नहीं की जाती है तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    पुलिस एफआइआर नहीं कर रही है

    उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, पूर्व मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता गोपाल भार्गव से लेकर ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों का मानना है कि संतोष वर्मा की टिप्पणी आपत्तिजनक है। पूरे मध्य प्रदेश में इसे लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं, लेकिन पुलिस एफआइआर नहीं कर रही है।

    संतोष आदिवासी वर्ग से आते हैं

    सूत्रों का कहना है कि सभी राज्य सरकार के इशारे की प्रतीक्षा कर रहे हैं, क्योंकि संतोष आदिवासी वर्ग से आते हैं और अजाक्स के अध्यक्ष हैं। प्रदेश में 21.9 प्रतिशत आबादी आदिवासी वर्ग की है। इनके लिए 230 सदस्यीय विधानसभा में 47 और लोकसभा की छह सीटें सुरक्षित हैं। लगभग 80 विधानसभा क्षेत्रों में आदिवासी मतदाता परिणाम प्रभावित करने की स्थिति में हैं।

    भाजपा हो या कांग्रेस, दोनों के प्रयास यही रहते हैं कि इस वर्ग को साधकर रखा जाए, इसलिए सत्ता से लेकर संगठन में इनका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर सर्वाधिक ध्यान दिया जाता है।

    जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं

    यह वर्ग कहीं नाराज न हो जाए, इस डर से सेना की अधिकारी सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक बयान देने वाले मंत्री विजय शाह के विरुद्ध सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की और न ही अब संतोष वर्मा के मामले में ऐसे कोई संकेत हैं। प्रयास यही है कि कैसे भी करके मामला ठंडा पड़ जाए, मगर ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। ब्राह्मण समाज कार्रवाई पर अड़ा है। जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं।

    माफी योग्य नहीं बयान

    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी का कहना है कि यह कोई सियासी मामला नहीं है। उन्होंने ब्राह्मण बेटियों को लेकर जो बयान दिया है, उसके लिए माफी काफी नहीं है। कार्रवाई होनी चाहिए। एफआइआर नहीं होती है तो आंदोलन मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा।

    कांग्रेस ने भी मौन साधा

    वोटबैंक की राजनीति के चलते कांग्रेस ने भी अजाक्स अध्यक्ष संतोष वर्मा के खिलाफ न तो कोई सार्वजनिक बयान दिया, न ही किसी बड़े नेता ने उनके विवादास्पद बयान की आलोचना की। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी वर्मा के मामले में मौन साध रखा है। जाहिर है दोनों दलों के नेता अजाक्स मामले को तूल नहीं देना चाह रहे हैं।