PreviousNext

कल तक सुलझा लिया जाएगा जजों के मतभेद का मामला- अटॉर्नी जनरल

Publish Date:Fri, 12 Jan 2018 06:17 PM (IST) | Updated Date:Fri, 12 Jan 2018 10:44 PM (IST)
कल तक सुलझा लिया जाएगा जजों के मतभेद का मामला- अटॉर्नी जनरलकल तक सुलझा लिया जाएगा जजों के मतभेद का मामला- अटॉर्नी जनरल
सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों द्वारा की गई प्रेस कांफ्रेंस पर कानून जगत के जानकारों ने भी अपनी राय दी है।

नई दिल्ली (एएनआई)। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार मौजूदा जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट की प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठाए, जिससे देश में हडकंप मचा हुआ है। इस प्रेस कांफ्रेस को लेकर कानून के जानकारों और पूर्व न्यायाधीशों ने भी अपनी- अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ जानकार इसे चौंकाने वाला फैसला बता रहे हैं, तो कुछ बता रहे हैं कि ऐसा करने के पीछे जरूर कुछ कारण रहे होगे।

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने समाचार एजेंसी को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जजों से जुड़ा मामला कल सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'आज की प्रेस कांफ्रेस को टाला जा सकता था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों के पास अपार अनुभव और जानकारी है। मुझे पूरा यकीन है की इस पूरे मसले को कल सुलझा लिया जाएगा।'

देश पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालकृष्णन ने मीडिया से कहा कि वह न तो चारों न्यायाधीशों का न तो समर्थन और न ही विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'जो हुआ है वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और इसे टाला जाना चाहिए था। न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर कभी सवाल नहीं उठना चाहिए था। घटनाक्रम से आम आदम यही मानेगा कि चीजें सही दिशा में नहीं जा रही हैं। पूर्ण अदालत शीघ्र बुलाई जाए।' 

पूर्व न्यायाधीश जस्टिस केटी थामस ने कहा, 'अब गेंद मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के पाले में है। वही इसका समाधान कर सकते हैं।' 

पूर्व न्यायाधीश जस्टिस केएस राधाकृष्णन ने कहा कि चारों वर्तमान न्यायाधीशों का लिखा पत्र सामान्य है।

पूर्व सालिसिटर जनरल एन. संतोष हेगड़े , 'इससे न्यायपालिका को अपूरणीय क्षति हुई है। लोकतंत्र में लोगों का भरोसा विधायिका और कार्यपालिका से उठ चुका है। उनका भरोसा न्यायपालिका में है। न्यायाधीशों का इस तरह सार्वजनिक रूप से सामने आने से लोगों का भरोसा इस प्रणाली से उठ सकता है।'

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) के नेता डी. राजा ने जस्टिस चेलमेश्वर से मुलाकात के बाद कहा कि जजों द्वारा उठाया गया कदम असाधारण है, और यह न्यायपालिका के गहरे संकट को दर्शाता है। मुलाकात के बारे में उठे सवालों पर उन्होंने कहा, 'जस्टिस चेलमेश्वर के साथ रिश्ता बहुत पुराना है। वे अपनी चिंताएं मेरे साथ बांटते हैं। अगर उनकी कुछ चिंताएं हैं, तो सांसदों को इस मामले पर विचार करके उसका हल ढूंढ़ने की जरूरत है।'

आर एस सोढ़ी, रिटायर्ड जज- 'मैं इसके नतीजों को लेकर बहुत ही दुखी हूं...यह निराश करने वाला है। आप प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सुप्रीम कोर्ट का कामकाज कैसे चला सकते हैं.... मुझे लगता है कि इन चारों जजों को अब वहां बैठने का अधिकार नहीं है। उनके कहने से लोकतंत्र खतरे में नहीं है। हमारे पास संसद है, कोर्ट है, पुलिस प्राशासन है।'

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ए.के. गांगुली- 'जजों द्वारा लगाए गए आरोपों से हैरान हूं, यह नहीं होना चाहिए था लेकिन इसके पीछे जरूर कोई ना कोई कारण रहा होगा। इससे लोगों के मन में न्यायपालिका के प्रति संदेह पैदा होगा।'

पूर्व कानून मंत्री  हंसराज भारद्वाज- 'न्यायपालिका पर आरोप से उसकी साख को झटका लगा है, न्यायपालिका अगर जनता का विश्वास खो देगी तो क्या बचेगा। यह कानून मंत्री की जिम्मेदारी है कि लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ न्यायपालिका का ठीक से संचालन हो पाए।'

जजों के चेहरे पर था दर्द: एडवोकेट तुलसी- 'सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों के द्वारा सुप्रीम कोर्ट प्रशासन पर आरोप लगाए जाने की घटना पर आश्‍चर्य व्‍यक्‍त करते हुए एडवोकेट केटीएस तुलसी ने इनकी वकालत की। तुलसी ने कहा, इस तरीके को अपनाने के पीछे जजों की बड़ी मजबूरी रही होगी। जब वे बोल रहे थे तब उनके चेहरे पर दर्द स्‍पष्‍ट तौर पर देखा जा सकता था।'

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, मुकुल मुद्गल, 'इसके पीछे कोई गंभीर वजह होगी कि जजों के पास प्रेस कॉन्फ्रेंस के अलावा कोई और चारा नहीं था। लेकिन इसका लोया से क्या मतलब है? यह मुझे नहीं पता और मैं राजनैतिक मुद्दे पर बात नहीं करना चाहता।'

सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह- 'मुझे लगता है यह एक ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस थी। यह बहुत अच्छा हुआ और भारत के लोगों को यह जानने का हक है कि न्यायपालिका के अंदर क्या चल रहा है। मैं इसका स्वागत करती हूं।'

वरिष्ठ वकील, उज्जवल निकम- 'यह न्यायपालिका के लिए एक काला दिन है। आज की प्रेस कांफ्रेंस से एक गलत मिसाल पेश कर दी है। आज से हर भारतीय हर न्यायिक व्यवस्था को शक की निागह से देखेंगा।'

भाजपा नेता, वकील और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी, 'जब जजों को प्रेस कांन्फ्रेंस करनी पड़ी तो उसमें कमी ढूढ़ने के बजाय उन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। प्रधानमंत्री को पहल करनी चाहिए और उन्हें चीफ जस्टिस और चारों जजों से संपर्क कर बातचीत के जरिए पूरे मामले को हल करना चाहिए।'

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण-  'ये चारों जज बहुत ही जिम्मेदार हैं। अगर वे यह कर रहे हैं तो हालात निश्चित तौर पर नियंत्रण से बाहर हो चुके होंगे। सीजेआई सभी मामलों को आवंटित करने की अपनी प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं।' 

 यह भी पढ़ें: न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार जजों की PC, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन पर लगाया आरोप

मोबाइल पर भी अपनी पसंदीदा खबरें और मैच के Live स्कोर पाने के लिए जाएं m.jagran.com पर
Web Title:Legal fraternitys Reactions on Four Judges Press Conference(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

कमेंट करें

नोटबंदी के बाद बढ़े आयकर चोरों के खिलाफ मामलेभाकपा नेता डी राजा मिले जस्टिस चेलमेश्वर से