नई दिल्ली, जेएनएन। लक्ष्मी विलास बैंक के खाता धारकों पर आरबीआइ ने बंदिशें लगा दी हैं। इससे पहले पीएमसी और यस बैंक के उपभोक्ता इस दौर से गुजर चुके हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि उपभोक्ता बैंक में जमा अपने पैसे को लेकर कितना सुरक्षित महसूस कर रहे हैं? क्या इससे बचा जा सकता है? दोनों ही सवालों का जवाब एक और सवाल में छिपा है। हमारे लिए कौन सा बैंक उपयुक्त है? स्टेट बैंक ऑफ इंदौर (अब एसबीआइ में विलयन) की जनरल मैनेजर रहीं एनी पवार के अनुसार जनता को इस वक्त पब्लिक सेक्टर के बैंकों पर ही भरोसा करना चाहिए। उसके लिए वे तीन तर्क देते हैं। 1993 में पहली बार 106 साल पुराने बैंक में इसी तरह स्थिति बनी थी। 1998, 2005 और 2006 में भी इसी तरह निजी बैंक में परेशानी आई थी। उस समय भी किसी बैंक के साथ विलयन कर रास्ता तलाशा गया था। इस बार भी ऐसी ही कोई व्यवस्था की जाएगी।

एक ही व्यक्ति बेशक अलग-अलग बैंकों में खाता नहीं खोले, लेकिन उसके परिवार में यदि चार सदस्य हैं तो वे एक बैंक के बजाए अलग-अलग बैंकों में खाता खोल सकते हैं। घर के पास स्थित बैंक में खाता खोलने की मानसिकता से उबरना होगा। किसी भी बैंक में खाता खोलने से पहले उसके बैलेंस शीट को पढ़ने-समझने की कोशिश करें।

यह सही है कि पब्लिक सेक्टर की बैंकों में पैसा रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है लेकिन उसमें ब्याज दर लगातार कम होते जा रहे हैं। ऐसे में लोगों को ज्यादा मुनाफा देने वाले बैंकों की ओर रुख करना होगा, मगर सावधानी के साथ। बैंक से जुड़ी हर खबर पर नजर रखें। अलर्ट रहकर ही आप अपने पैसे को सुरक्षित रख सकते हैं।

पांच लाख रुपये वापस मिलेंगे

आपके बैंक में अगर पांच लाख से ज्यादा पैसे जमा हैं तो बैंक के डूबने की सूरत में आपको पांच लाख रुपये ही वापस मिलेंगे। इस साल से बजट में इसका प्रावधान किया गया है। यानी डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन की ओर से ग्राहकों को बैंक डिपॉजिट पर पांच लाख रुपये की ही सुरक्षा गारंटी दी जाती है। यानी जमा राशि पर पांच लाख रुपये का ही बीमा होता है।

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