लखनऊ। करीब सोलह महीने बाद कुंडा के सीओ रहे जिया उल हक की हत्या का मामला फिर सुर्खियों में है। सीबीआइ अदालत से डिप्टी एसपी जियाउल हक हत्याकांड की तफ्तीश खारिज होने के बाद जांच अधिकारी अदालत के सवालों का जवाब तलाशने में जुटे हैं।

सीबीआइ जल्द अदालत से इजाजत लेकर खाद व रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह के करीबी रोहित सिंह, गुड्डू, गुलशन व हरिओम श्रीवास्ताव का पॉलीग्राफी (लाइ डिटेक्टर टेस्ट) टेस्ट कराएगी। जरूरत पड़ने पर नार्को टेस्ट भी कराया जा सकता है। इस परअंदेशा जताया जा रहा है कि अब इस प्रकरण में नए खुलासे हो सकते हैं।

गौरतलब है कि प्रतापगढ़ के कुंडा सर्किल के पुलिस क्षेत्राधिकारी जियाउल हक की उस समय हत्या की गई थी, जब वह वर्ष 2013 में दो मार्च को बलीपुर गांव में नन्हें यादव की हत्या के मामले की छानबीन के लिए मौके पर गए थे। इस मामले में जिया उल हक की पत्नी परवीन आजाद ने कैबिनेट मंत्री व निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को नामजद करते हुए आधा दर्जन लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

सीबीआइ ने रघुराज को क्लीन चिट दी थी, लेकिन तफ्तीश में तमाम अनसुलझे सवाल छोड़ दिए थे। मामला कोर्ट पहुंचने पर परवीन ने तफ्तीश पर आपत्ति दाखिल की थी। सीबीआइ कोर्ट की जज श्रद्धा तिवारी ने तफ्तीश में कई खामियां गिनाते हुए सीबीआइ की तफ्तीश खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि सीबीआइ ने रघुराज का सिर्फ पॉलीग्राफी टेस्ट कराया, मगर पुलिसकर्मियों समेत अन्य का पॉलीग्राफी टेस्ट या नार्को टेस्ट नहीं कराया गया।

अदालत से तफ्तीश खारिज होने से खासी किरकिरी झेल रही सीबीआइ ने नए सिरे से तफ्तीश शुरू की है, जिसमें अदालत की ओर से उठाए गए हर सवाल का जवाब तलाशा जा रहा है।

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