नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। पाकिस्‍तान की जेल में बंद भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव (Kulbhushan Jadhav) के मामले में हेग स्थित अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय (International Court of Justice, ICJ) आज यानी बुधवार को अपना फैसला सुनाने वाला है। पाकिस्‍तान ने कुलभूषण जाधव को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया था। बाद में पाकिस्‍तान की एक सैन्‍य अदालत ने अप्रैल 2017 में जाधव को आतंकवाद और जासूसी के आरोपों में मौत की सजा सुना दी थी। इसके खिलाफ भारत ने अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

पाकिस्‍तान ने सरबजीत के साथ भी किया था छल 
जाधव से मिलता जुलता मामला सरबजीत सिंह (Sarabjit Singh) का भी था। पंजाब के किसान सरबजीत के साथ भी पाकिस्‍तान ने छल किया था। पाकिस्‍तान ने सरबजीत को आतंकवाद के झूठे आरोपों में जेल में बंद किया था। वह अनजाने में 30 अगस्त 1990 को पाकिस्तान की सीमा पार कर गए थे। पाकिस्‍तानी की एक स्‍थानीय अदालत द्वारा साल 1991 में उन्‍हें फैसलाबाद और लाहौर में बम हमलों के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई थी। इस सजा को सुप्रीम कोर्ट समेत ऊपरी अदालतों में बरकरार रखा गया था।

सरबजीत के खिलाफ नहीं थे ठोस सबूत 
बम हमलों को लेकर सरबजीत के खिलाफ कोई ठोस सुबूत नहीं थे, इसलिए जुर्म कबूलने के लिए उस बार बार प्रताडि़त किया गया। हालांकि, दाखिल की गई दया याचिकाओं के बाद उसकी मौत की सजा बार बार टाली जाती रही। भारत की ओर से बार बार सरबजीत की रिहाई की मांग की गई और कहा गया कि वह कोई जासूस नहीं है और उसकी पहचान में अधिकारियों से कोई गलती हो गई है। बावजूद इसके पाकिस्‍तान ने सरबजीत को रिहा नहीं किया। आखिरकार पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में 26 अप्रैल 2013 को सरबजीत सिंह की हत्या कर दी गई थी।

ठुकरा दी थी भारत की हर मांग
दो मई 2013 को पाकिस्‍तान की ओर से यह कहा गया कि साथी कैदियों के हमले में सरबजीत गंभीर रूप से घायल हो गया था। लेकिन पाकिस्तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता अंसार बर्नी (Ansar Burney) की मानें तो सरबजीत जीवित था। उसे मदद की जरूरत थी लेकिन पाकिस्‍तानी सरकार ने सेना के दबाव में भारत की ओर से की गई मानवीय आधार पर सरबजीत की रिहाई की मांग ठुकरा दी गई थी। भारत ने कहा था कि बेहतर इलाज के लिए उसे सौंप दिया जाए लेकिन यह मांग भी पाकिस्‍तान ने ठुकरा दी थी। भारत की ओर से यह भी कहा गया कि सरबजीत का इलाज किसी दूसरे देश में कराया जाए लेकिन पाकिस्‍तान ने यह भी ठुकरा दिया था।

हत्‍या में जेल के अधिकारियों का था हाथ 
सरबजीत के परिजनों को अस्‍पताल में मिलने की इजाजत दी गई थी, उनका कहना था कि इस हमले में लखपत जेल के अधिकारियों का हाथ था। सरबजीत सिंह की गिरफ्तारी और पाकिस्‍तान की जेल में उसकी हत्‍या का मामला भी जाधव के केस से मिलता जुलता है। जाधव को पाकिस्‍तानी अधिकारियों द्वारा इरान से अगवा किए जाने के बाद उस पर जासूस और आतंकी होने के आरोप लगाए गए। जाधव के मामले से पहले भारत ने कभी भी अंतरराष्‍ट्रीय न्‍यायालय का रुख नहीं किया था। ऐसे में जाधव की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं उठनी लाजमी हैं।

Posted By: Krishna Bihari Singh

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