हैदराबाद, एजेंसी। तेलंगाना के IT और उद्योग मंत्री के टी रामाराव (KT Ramarao) ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम (Juvenile Justice Act), भारतीय दंड संहिता (IPC) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) में गलतियों के कारण जुबली हिल्स में नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्‍कर्म मामले में कथित आरोपियों को जमानत मिल गई है। उन्होंने शुक्रवार को ट्वीट करके इन अधिनियमों को लेकर निशाना साधा।

IPC, CrPC अधिनियम में की संशोधन की जरूरत

रामाराव ने ट्वीट किया, ' जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम (Juvenile Justice Act), भारतीय दंड संहिता (IPC) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) में खामियों की वजह से दुष्कर्म के दोषियों को जमानत मिल जाती है और जघन्य अपराध में भी छूट जाते हैं। इसलिए मैं मांग करता हूं कि इन अधिनियमों में संशोधन किया जाए, ताकि आजीवन कारावास की सजा प्राप्त दोषियों को जमानत नहीं मिल सके।'

बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म के दोषी रिहा

इससे पहले मंत्री ने बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा पाने वाले 11 लोगों की रिहाई की आलोचना करते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से हस्तक्षेप करने की मांग की। उन्होंने दोषियों को छूट देने के गुजरात सरकार के फैसले को रद्द करने के लिए कहा था।

क्या है बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामला

बता दें कि गुजरात दंगे के दौरान 2002 में हुए बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 11 कैदियों को स्वतंत्रता दिवस पर जेल से रिहा कर दिया गया था। सभी दोषी गोधरा उपजेल में बंद थे। दोषियों को गुजरात सरकार की माफी योजना के तहत रिहा किया गया था। मुंबई में सीबीआइ की एक विशेष अदालत ने 11 दोषियों को 21 जनवरी 2008 को सामूहिक दुष्कर्म और बिलकिस बानो के परिवार के सात सदस्यों की हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

जानकारी के अनुसार, 28 मई को जुबली हिल्स में एक नाबालिक लड़की के साथ पार्टी से घर लौटने के समय सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, जिसमें पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन सभी इस समय जमानत पर बाहर है।

Edited By: Sonu Gupta