[पं अजय कुमार द्विवेदी]। मां दुर्गा की सातवीं शक्ति हैं के तन का रंग अंधकार की भांति गहरा काला है। उनके गले में चपला की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह गोल हैं, जिनसे विद्युत की ज्योति चमकती रहती है। नासिका के श्वास-प्रश्वास से अग्नि की ज्वालाएं प्रवाहित होती रहती हैं। इनका वाहन गर्दभ है। मां का स्वरूप भले ही अत्यंत भयानक हो, लेकिन ये सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं। तभी तो इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।

स्वरूप का ध्यान

मां के कल्याणकारी स्वरूप का ध्यान हमें अभय प्रदान करता है। यह प्रेरणा देता है कि डर का सामना कर उसे पराजित करने से ही हमारा कल्याण संभव है। यह स्वरूप हमारी आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत कर हमें जीवन के कठिन संघर्षों में भी धैर्य, आशा व विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा प्रदान करता है। यह हमें कर्मयोगी जीवन जीने की कला सिखाता है। हमारे आलस्य व अहंकार को नष्ट कर हमें सत्य के सन्मार्ग पर चलने का सामथ्र्य देता है।

आज का विचार

भय से बाहर निकलने का एक मात्र रास्ता यह है कि हम भय का सामना करें।

ध्यान मंत्र

करालरूपा कालाब्जसमाना

कृतिविग्रहा।

कालरात्रि: शुभं दद्यात् देवी

चंडाट्टहासिनी।। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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