[पं अजय कुमार द्विवेदी]। मां दुर्गा की नौवीं शक्ति हैं मां सिद्धिदात्री, जो समस्त सिद्धियां प्रदान करती हैं। सिद्धियां आठ बताई गई हैं-अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व एवं वशित्व। देवी पुराण के अनुसार, भगवान शंकर ने इन्हीं शक्तिस्वरूपा देवी की उपासना कर समस्त सिद्धियां प्राप्त की थीं, जिसके प्रभाव से शंकर जी का आधा शरीर स्त्री का हो गया था। इसी कारण शिव जी अद्र्ध-नारीश्वर कहलाए। मां सिद्धिदात्री सिंहवाहिनी, चतुर्भुजा तथा सर्वदा प्रसन्नवदना हैं।

स्वरूप का ध्यान

मां के दिव्य स्वरूप का ध्यान हमें प्रत्येक क्षेत्र में सिद्धि प्रदान करने की प्रेरणा देता है। हमारी प्रतिभा व योग्यता का अभिवद्र्धन करके हमें कार्यकुशल बनाता है। सदाचार के मार्ग पर अग्रसर होने का संदेश प्रदान करता है। मां के इस अंतिम स्वरूप का ध्यान हमें परम सुख व शांति की अनुभूति कराता है। यह हमारी जीवनी शक्ति का संवर्धन करके हमें धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की सिद्धि की सामथ्र्य प्रदान करता है। यह हमारी मेधा को श्रेष्ठ कर्मों में प्रवृत्त करके हममें दिव्यता की भावना का अभिवद्र्धन करता है।

आज का विचार

अपने अंतस को परिमार्जित कर उच्चता की ओर ले जाकर ही हम सिद्धि पा सकते हैं।

ध्यान मंत्र

सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैर सुरैरमरैरपि।

सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा

सिद्धिदायिनी।।

Posted By: Sanjay Pokhriyal

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