नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। भारतीय मानक समय ( Indian Standard Time) की स्थापना 1 सितंबर 1947 को हुई थी। ये अंतरराष्ट्रीय मानक समय ग्रीनविच मीन टाइम (Greenwich Mean Time) से अलग है। GMT का निर्धारण इंग्लैंड के ग्रीनविच स्थित ऑब्जर्वेटरी से होता है, जबकि आईएसटी का निर्धारण इलाहाबाद के नैनी से होकर गुजरने वाली मध्याह्न रेखा से होता है। ये रेखा 82.5 डिग्री पूर्वी देशांतर से होकर गुजरती है। भारतीय मानक समय, ग्रीनविच मीन टाइस से करीब साढ़े पांच घंटे आगे है। इसका अर्थ है कि यदि भारत में शाम के छह बजे होंगे तो लंदन में उस वक्‍त दोपहर के 12:30 बजे होंगे। उत्‍तर कोरिया को छोड़कर दुनिया के सभी देश ग्रीनविच मीन टाइम को मानते हैं। हालांकि, आईएसटी की स्‍थापना के बाद भी भारत में कलकत्‍ता का 1948 तक और बॉम्‍बे का 1955 तक अपना टाइम जोन था। जिस वक्‍त आईएसटी की स्‍थापना हुई थी उस वक्‍त सेंट्रल ऑब्जर्वेटरी चेन्‍नई (तत्‍कालीन मद्रास) में थी, जिसको बाद में प्रयागराज जिले में शंकरगढ़ किले में स्‍थापित किया गया।

पूर्व और पश्चिम में दो घंटे का अंतर 

भारत के पूर्वी छोर और पश्चिमी छोर के बीच की दूरी 2933 किमी है। देश के पश्चिमी राज्‍यों के मुकाबले पूर्वोत्‍तर इलाकों में सूरज दो घंटा पहले निकल जाता है। यही वजह है कि देश के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों के सरकारी और निजी कार्यालयों में कामकाज पश्चिमी राज्‍यों की अपेक्षा दो घंटे पहले शुरू हो जाता है। इसकी एक बड़ी वजह ऊर्जा की बचत करना भी है।

अलग-अलग टाइम जोन बनाने की सिफारिश

1980 के अंत में शोधकर्ताओं ने देश में दो या तीन अलग-अलग टाइम जोन बनाने की सिफारिश की थी। हालांकि इन सिफारिशों को माना नहीं गया। वर्ष 2001 में भारत सरकार ने विज्ञान और तकनीकी मंत्रालय (DST) के अंतर्गत चार सदस्‍यों की एक कमेटी का गठन किया। इस कमेटी का काम देश में अलग-अलग टाइम जोन बनाने के कारणों का पता लगाना था। वर्ष 2004 में इस कमेटी की रिपोर्ट को तत्‍कालीन विज्ञान और तकनीकी मंत्री कपिल सिब्‍बल द्वारा सदन में रखा गया। उन्‍होंने आईएसटी में किसी तरह के बदलाव की सिफारिशों को नकार दिया। उनका कहना था कि आईएसटी का निर्धारण करते समय मध्‍याह्न रेखा को इसलिए चुना गया था क्‍योंकि वो केंद्र में थी। उनके मुताबिक भारत इतना बड़ा देश नहीं है जिसमें अलग-अलग टाइम जोन की जरूरत होनी चाहिए। 

चाय बागान टाइम

हालांकि केंद्र सरकार ने राज्‍यों को अपने यहां पर उद्योग धंधों के कामकाज के लिए ये अधिकार जरूर दिया कि वो प्‍लांटेशन लेबर एक्‍ट 1951 के तहत अपने स्‍थानीय समय को तय कर सकते हैं। इस तरह से असम के चाय बागानों में काम करने वाले लोगों के लिए एक अलग टाइम जोन बनाया गया जिसको चाय बागान टाइम (Tea Garden Time) कहा जाता है। ये भारतीय मानक समय से एक घंटा आगे है। इसका आधिकारिक तौर पर इस्‍तेमाल भी किया जाता है। इसके बाद जब-जब देश में अलग-अलग टाइम जोन की बात उठी तब-तब उसको केंद्र द्वारा खारिज कर दिया गया। 

ईस्‍टर्न इंडिया टाइम या इर्स्‍टन इंडिया डे-लाइट टाइम

वर्ष 2004 में देश के उत्‍तर पूर्वी राज्‍यों के लिए अलग टाइम जोन बनाने की मांग के साथ असम के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री तरुण गोगोई ने एक प्रचार अभियान की शुरुआत भी की थी। वर्ष 2017 में विज्ञान और तकनीकी विभाग ने इस बात का संकेत दिया कि वो देश में अलग-अलग टाइम जोन को बनाने पर दोबारा विचार कर सकता है, लेकिन इससे पहले इस पर शोध करने की जरूरत होगी। इसमें ये भी कहा गया कि देश के पूर्वोत्‍तर राज्‍यों में भारतीय मानक समय की जगह ईस्‍टर्न इंडिया टाइम या इर्स्‍टन इंडिया डे-लाइट टाइम बनाया जा सकता है। ऐसे में इन राज्यों में लागू आईएसटी को पूरी तरह से ईआईटी पर शिफ्ट किया जा सकेगा। इसके लिए एक प्रपोजल भी भेजा गया था जिसमें इस टाइम जोन को 14 अप्रैल, अंबेडकर जयंती के दिन से शुरू कर 2 अक्‍टूबर तक चलाने की बात कही गई थी।

टाइम सिग्‍नल

गौरतलब है कि नई दिल्‍ली स्थित नेशनल फिजीकल लैब से आधिकारिकतौर पर टाइम सिग्‍नल जनरेट किया जाता है। ये टाइम सिग्‍नल एटोमिक क्‍लॉक आधारित होता है जो पूरी दुनिया के समय से तालमेल बिठाता है। जहां तक आईएसटी की बात है तो ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन के माध्‍यम से बताया जाने वाला समय ही भारतीय मानक समय होता है।

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