नई दिल्‍ली (ऑनलाइन डेस्‍क)। भारत का चीने से सीमा पर तनाव इस वर्ष अप्रैल में शुरू हुआ था, लेकिन जून में ये तनाव उस वक्‍त अपने चरम पर पहुंच गया था जब चीन के सैनिकों ने लोहे की रॉड पर लगे कंटीले तारों से भारतीय जवानों पर हमला किया था। इसमें भारतीय सेना के बीस जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद लगातार तनाव कायम है। हालांकि चीन की तरफ से कहा जा रहा है कि उसकी सेना तनाव वाली जगह से पीछे चली गई है लेकिन जानकार मानते हैं कि चीन पर विश्‍वास करना कोई समझदारी नहीं है। चीन ने भी अपनी सेना और एयरफोर्स को पूरी तरह से तैयार रखा हुआ है। वहीं भारत भी पूरी तरह से तैयार है।

रिटायर्ड एयर मार्शल अनिल चोपड़ा का कहना है कि भारत से गलवन वैली में तनाव के बाद चीन के तिब्‍बत में दो एयरफील्‍ड हैं जहां पर चीन ने अपनी एयरफोर्स की स्‍क्‍वार्डन तैनात की हुई हैं। इसमें कश्‍मीर के उत्‍तर में करीब 300 किमी की दूरी पर स्थित होतान एयरफील्‍ड है। यहां दो स्‍क्‍वार्डन तैनात हैं। इसके अलावा काशी जिसको वो काशगर बोलते हैं वहां भी चीन की एयरफोर्स की स्‍क्‍वार्डन तैनात हैं। इसके अलावा चीन की तीसरी एयरफील्‍ड है कारगुंजा जो भारत की सीमा से 125 किमी की ही दूरी पर स्थित है। ये एयरफील्‍ड लेह से 200-250 किमी की दूरी पर है। यहां पर भी चीन ने अपनी एयरफोर्स को तैनात किया हुआ है।

चीन की इन तैयारियों की तुलना यदि भारत से की जाए तो भारत की जम्‍मू कश्‍मीर समेत इसके आसपास की एयरफील्‍ड पूरी तरह से तैयार हैं और चीन से ज्‍यादा हैं। इसमें अंबाला, आदमपुर, पठानकोट उधमपुर, श्रीनगर, लेह शामिल हैं। किसी भी आपात स्थिति में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान कुछ ही देर मे चीन में घुसकर कहर बरपा सकते हैं। एयर मार्शल चोपड़ा का कहना है कि भारतीय एयरफलड की एक बड़ी खासियत ये भी है कि हमारे जहाज ज्‍यादा वैपन और ज्‍यादा फ्यूल लेकर जा सकते हैं। उनका ये भी कहना है कि भारत को एयरफील्‍ड और अपने लड़ाकू विमानों के चलते इस पूरे इलाके में एडवांटेज मिली हुई है।

चीन ने भारत से तनाव के चलते अपनी दो डिवीजन उस इलाके में तैनात की हुई हैं जहां पर तनाव है। हालांकि जहां तक भारत की बात है तो क्‍योंकि हमें पाकिस्‍तान और चीन पर लगातार निगाह रखनी होती है इसलिए हमारी दो डिवीजन वहां पर हर वक्‍त तैयार रहती हैं। हालिया तनाव के मद्देनजर वहां पर भारत ने एक्‍सट्रा डिवीजन भी तैनात की है। चोपड़ा के मुताबिक दोनों देशों की सीमा के दस किमी के दायरे में दोनों ही तरफ लड़ाकू विमान उड़ान नहीं भर सकते हैं। ऐसा करना अंतरराष्‍ट्रीय नियमों का उल्‍लंघन है।

हालांकि हेलीकॉप्‍टर को लेकर इसकी छूट है क्‍योंकि उन्‍हें सेना की पोस्‍ट पर जरूरी सामान पहुंचाना होता है। लिहाजा वो सीमा के बेहद करीब तक जा सकते हैं। लेकिन इसकी भी एक मियाद है जो सीमा से एक किमी दूर है। किसी भी वायुसेना का दूसरे देश के खिलाफ इस्‍तेमाल करने का अर्थ युद्ध की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। उन्‍होंने बताया कि तनाव के मद्देनजर अक्‍सर सीमा की सुरक्षा और निगरानी के लिए अनमेंड एयरक्राफ्ट उड़ान भरते हैं।

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Posted By: Kamal Verma

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